Wednesday, July 21, 2010

नजर आती है वो सामने वाली कुर्सी

बार-बार मेरी निगाह मेरे सामने वाली कुर्सी पर जाकर टिक जाती है। जहाँ कभी वेबदुनिया के हमारे साथी पत्रकार अभिनय कुलकर्णी बैठा करते थें। उनकी जितनी कमी पिछले महीने उनके द्वारा वेबदुनिया को खुशी-खुशी अलविदा कहकर जाने से न हुई। उससे ज्यादा कमी आज उनके दुनिया छोड़ जाने से हो रही है। अब बार-बार मेरी नजर उसी खाली‍ पड़ी कुर्सी पर जाकर ठहर जाती है। जहाँ कभी मराठी भाषा में हँसी-ठिठौली की व फोन पर बातचीत की आवाजें मेरे कानों में पड़ा करती थी।

आज भी जिंदा हूँ मैं :
मराठी वेबदुनिया का एक सशक्त पत्रकार 19 जुलाई 2010 की रात को हम सभी से रूठकर अंधेरे के आगोश के साथ ही रात ही को पौने दो बजे सदा के लिए मौत की गहरी नींद में सो गया। जब दूसरे दिन इस दुर्घटना की खबर हम सभी को लगी। तब अचानक वो मँजर आँखों के सामने आ गया। जब कभी वेबदुनिया के कार्यक्रमों में हम सभी एक साथ बैठकर मुस्कुराते थें। नवरात्रि, गणेशोत्सव ... आदि अवसरों में हमेशा हँसते-मुस्कुराते अभिनय जी का चेहरा आज मेरी आँखों के सामने आकर मानों बार-बार यहीं कह रहा हो कि मैं मरा नहीं हूँ। मैं जिंदा हूँ आप सभी के आत्मविश्वास में, आपके दिलों में आपक‍ी ऊर्जा बनकर। मैं एक पत्रकार हूँ। जो कभी मरता नहीं। जिसकी लेखनी की सशक्त आवाज उसे हमेशा आपकी यादों में जीवित रखती है। ऐसी प्रतिध्वनि के कानों में गूँजते ही मुझे लगा कि अब राह में बिछड़े हमारे साथी की आवाज और उसके परिवार का संबंल हम लोग है। जो इस दु:ख की घड़ी में कुलकर्णी परिवार का साथ देने के साथ ही अपनी निष्पक्ष व सच्ची पत्रकारिता द्वारा अपने साथी को सच्ची श्रृद्धांजलि अर्पित करेंगे।

खुशियों पर काल का कहर :
अभिनय कुलकर्णी को महाराष्ट्र में एक अच्छी नौकरी मिली थी। जिसके पदभार को ग्रहण करके फिर से अपने परिवारजनों के चेहरों पर खुशियों की मुस्कुराहट बिखेरने के लिए यह पत्रकार सपत्निक नासिक जा रहे थे। लेकिन समय को इनकी खुशियाँ रास नहीं आई और काल ने इन पर ऐसा कहर बरपाया कि बीच राह में ही धूलिया के करीब इनकी बस की ट्रक से हुई जोरदार टक्कर ने हमसे हमारा एक हँसमुख व प्रतिभावान साथी पत्रकार हमेशा हमेशा के लिए छीन लिया और हमें हँसते-मुस्कुराते अभिनय कुलकर्णी की यादों के भँवर में छोड़ दिया।

किसी के साथ भी ऐसे हादसें न हो :
बड़े ही शालीन, सभ्य व बेदाग चरित्र वाले अभिनय कुलकर्णी की कमी को कोई पूरा नहीं कर सकता पर वक्त के आगे किसी की नहीं चली है। हम आज है कल नहीं। हममें से किसी के भी साथ ऐसा हादसा घटित हो सकता है। अभिनय जी को नम आँखों से श्रृद्धांजलि देने के साथ ही मैं बस यही कहना चाहूँगी कि आखिर क्यों हमारे वाहनों की रफ्तार इतनी अधिक बढ़ जाती है कि ये बेलगाम होते वाहन समय की रफ्तार को भी मात देकर हमारी जिंदगियों से खेल जाते हैं और हमें दे जाते हैं तन-मन में सिहरन पैदा करने वाली दुर्घटनाओं की यादें।

मेरे साथियों! आओं और आवाज उठाओं ताकि इस बेलगाम होते ट्राफिक पर लगाम कसी जाएँ और हम बेखौफ होकर अपने परिवार के साथ सड़कों पर वाहनों से सुखद यात्रा कर सके। कही न कही किसी वाहन चालक की लापरवाही व तेज रफ्तार ने ही हमारे साथी को हमेशा के लिए मौत की गहरी नींद में सुला दिया है।

अंत में अभिनय जी को श्रृद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही उन्हें मेरा शत-शत नमन।

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