Tuesday, August 24, 2010

अबकी राखी लाई लंबा इंतजार

राखी पर अपने भाई अमित के इंतजार में भूमिका दरवाजे की ओर टकटकी लगाए उसके आगमन के इंतजार में पलके बिछाए बैठी है। वहीं अमित के माता-पिता दरवाजे से आती हर आहट पर चौककर देखते हैं कि शायद कोई उनके बेटे अमित के मिलने की खबर आया होगा। जिसे सुन उनके मन को कुछ संतोष मिलेगा और उनका लंबा इंतजार खत्म होगा पर अब वक्त हर दिन उनके हाथों से रेत की तरह फिसलता जा रहा है लेकिन उनके बेटे का कोई पता नहीं चल पा रहा है। अबकी राखी पर जहाँ हर घर में जश्न का माहौल है। वहीं रतलाम में कस्तूरबा नगर निवासी हरीशचंद्र शर्मा के घर में पिछले कई दिनों से सन्नाटा ही सन्नाटा पसरा हुआ है। यहाँ बस गूँजती है तो फोन की घंटियाँ या अमित के इंतजार में बार-बार बेसब्र होते माता-पिता के करूण रूदन की आवाजें।

इस घर में हर किसी के माथे पर नजर आती चिंता की मोटी लकीरे व पल-पल में डबडबाती आँखों के आँसू बस हर मिलने-जुलने वालों से यही सवाल पूछ रहे है कि क्या आप हमारे अमित को ढूँढकर ला सकते हो? इस परिवार का बेटा अमित शर्मा गुड़गाँव की 'इंफो एज इंडिया' कंपनी में फील्ड ऑफिसर के पद पर कार्य कर रहा था। कंपनी के लिए बिहार के बक्सर में राजनैतिक सर्वे करने गया अमित विगत 6 माह से वहाँ सर्वे कार्य कर रहा था। सर्वे में सहयोग हेतु अमित ने बिहार के ही 10 युवकों को नियुक्त भी किया था। अपने अधीन कार्य करने वाले इन कर्मचारियों को वेतन देने के बाद जब अमित 16 अगस्त को अपने गृहनगर आने की तैयारी कर रहा था। तब के लिए काल का कहर बनकर आए 16 अगस्त के उस मनहूस दिन न जाने ऐसा क्या हुआ कि बक्सर की उन वादियों में अमित लापता हो गया। उस दिन से लेकर आज तक अमित के जीवित या मृत होने की किसी पुख्ता खबर का पता नहीं चल पाया है।

अमित के साथ बिहार में सर्वे कार्य कर रहे मनोज राम द्वारा अमित के परिवारजनों को फोन पर दी गई सूचना पर यकीन करें तो अमित बक्सर(आरा जिला) के यमुना घाट पर गंगा नदी में स्नान करने के दौरान गंगा के तेज बहाव में बह गया पर मनोज क‍ी कही इस बात में कितनी सच्चाई है इस पर से पर्दा उठना अभी शेष है।

अब आप ही विचार कीजिए कि यदि अमित गंगा में बह जाता तो आज दिन तक कही न कही से अमित का मृत शव किसी न किसी के हाथ लगता और उसके मृत होने की खबर उसके परिवार को मिलती। परिस्थितियों को देखते हुए यह भी हो सकता है कि अमित का अपहरण हो गया हो या हो सकता है उसे किसी ने मारकर उसके शव को नदी में बहा दिया हो। ऐसे में निश्चित तौर पर हमारे संदेह की सुई अमित के सहयोगी मनोज राम पर जाकर ही टिकती है। जिसके द्वारा अमित के परिवारजनों को अमित के गंगा नदी में बहने की सूचना दी गई थी।

मैं आपसे केवल इतना अनुरोध करना चाहूँगी कि कही न कही मेरे या आपके माध्यम से अमित के लापता होने की खबर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचे व प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप हम सभी लोग हरीशचंद्र शर्मा के परिवार की तलाश में उनके सहयोगी बने। आप सभी ब्लॉगर बंधुओं के सहयोग की कामना में अंत में मैं यही कहूँगी।


न कोई कहासुनी, और न ही कोई ग़म
कहाँ गया इस घर का लाल, इसी बात का है ग़म
जब बँधी है हम सभी की कलाईयों में राखियाँ
तो क्यों सूनी सूनी है लापता अमित की कलाईयाँ


- गायत्री शर्मा

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