Friday, September 3, 2010

याद आती है माँ

आज फिर से कसक उठी है मन में
और हुआ है जीने-मरने के बीच द्वंद्व
जीवन कहता है मैं तुझे तिल तिल खाऊँगा
मौत का सौदागर कहता है करले मेरा आलिंगन
मैं तुझे दु:खों से मुक्ति दिलाऊँगा ....
कभी तो लगता है क्या इन संघर्षों का अंत होगा
या फिर अंत होगा रात दिन दु:खों की सिसकियों का


दोनों का मुझे कोई अंतिम छोर नजर नहीं आता है
इसी बीच मेरे भीतर बैठा दिल कसमसाता है
लेकिन दु:ख की घडि़यों में भी कोई ऊर्जा दे जाता है
मेरे आँसूओं को पौछता मुझे माँ का झीना आँचल नजर आता है
जो मुझमें फिर से जीने का जोश जगाता है
सच कहूँ तो दु:ख में हमेशा माँ का चेहरा ही मुस्कुराता नजर आता है।

मेरी प्रेरणा मेरी माँ है,जिसके संघर्ष ही मेरी ऊर्जा है
‍जिसकी खुशियाँ ही मेरे जीवन की सार्थकता
सच कहूँ तो दोस्तों,जब जब भ‍ी यह दुनिया मुझे सताती है
तब तब मुझे माँ की शीतल गोद नजर आती है।


- गायत्री शर्मा

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