Tuesday, November 26, 2013

आरूषि ने किया साढ़े पाँच साल इतंजार


माँ-बाप की लाडली लाडो
जब मौत की नींद सोई
तब न बाप ने सुनी उनकी चीखे
और न माँ की छाती फूट-फूट कर रोई

हत्यारे दंपत्ति को हँसते देख मानवता भी
सिसकियाँ भर-भर रोई
जब माँ-बाप ही बन गए कसाई
तो बलि की बेदी पर नन्हीं आरूषि भी
चूजा बन खुशी-खुशी सोई

शक से हुआ संबंधों का अंत
और मच गया रिश्तों में महासंग्राम
जो रिश्ते कल हो गए थे लाश में तब्दील
अब वही करने लगे न्याय की गुहार

सर्जिकल ब्लेड की तीक्ष्ण धार
और गोल्फ स्टिक के जानलेवा वार
न काट पाएँ और दबा पाएँ  
आरूषि हेमराज की साँसो के तार

दफन होकर भी साढ़े पाँच साल तक
करती रही वो कानून से न्याय की गुहार
लेकिन आज कोर्ट में मिली सजा भी
न दिला पाई इस बेटी को पूरा इंसाफ ।

- गायत्री 

2 comments:

संजय जोशी "सजग " said...

जब माँ-बाप ही बन गए कसाई ....

सच आयना ..आपकी अभिव्यक्ति

Gayatri Sharma said...

आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया संजय जी।