Sunday, November 24, 2013

है जिंदगी इस पल में ...

कब, कैसे और कहाँ
शायद ये न तुम्हें पता है और न मुझे

पर आज, अभी और इस पल में ही
हम सब कुछ पाकर जिंदगी को पूर्ण मान रहे हैं।

सपनों से शुरू हुई यह हकीकत
ईश्वर की इबादत का परिणाम है या कर्मों का

जो भी है यह तो साफ है कि

इस पल में ही जिंदगी है।
- गायत्री  

No comments: