Thursday, June 5, 2014

कानून का अज्ञान, नहीं है बचाव का उपाय

एक-दूसरे के बीच रफ्तार की प्रतिस्पर्धा और जल्दबाजी के कारण होती सड़क दुर्घटनाएँ आए दिन हमें धरती पर ही नरकलोक के दर्शन करा जाती है। फोर लेन, सिक्स लेन या रेड बस की लेन ही क्यों न हो, खुली आँखों से अंधी बन अंधाधुंध रफ्तार से दौड़ती गाडि़याँ कभी रैलिंग से टकराती है तो कभी गड्ढ़े में गिर जाती है, कभी आपस में ‍भीड़ जाती है तो कभी राह चलतो को घसीट ले जाती है। गंभीर सड़क दुर्घटनाओं की भयावहता को देखकर ऐसा लगता है जैसे गहरी नींद में या शराब के नशे में धूत होकर ड्राइवर गाडि़यों के स्टेयरिंग थामता है और यमराज बन कई लोगों की मौत की कहानी रचता है। हाल ही में कैबिनेट मंत्री गोपीनाथ मुंडे की सड़क दुर्घटना में हुई दुखद मौत ड्राइवर की लापरवाही की ओर ही ईशारा कर रही है। कहते हैं जब आम आदमी मरता है तो प्रशासन सोता है लेकिन जब खास आदमी मरता है तो उसकी मौत के कारणों को खोजने के लिए प्रशासन सरपट इधर-उधर दौड़ता है। कुछ ऐसा ही इस हादसे के बाद भी देखा गया। इस हादसे से सबक लेते हुए मौजूदा सरकार ने मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव के संकेत दिए है, जो जनता की सुरक्षा के प्रतिनई सरकार की एक सराहनीय पहल है।

मोटर व्हीकल एक्ट 1988, इस एक्ट के अंर्तगत वाहन की गति, वाहन चलाने संबंधी गति, सुरक्षा आदि संबंधी नियम और उन नियमों को तोड़ने पर जुर्माने व सजा का प्रावधान है लेकिन शायद हममें से बहुत से लोगों ने तो इस एक्ट का नाम पहली बार सुना होगा। तभी तो एक्ट के बारे में जानकारी के अभाव में हम ट्राफिक के जरूरी कायदे-कानून को नहीं समझ पाते हैं और मनचाहे ढंग से फॉर्मूला वन रेसर बन वाहनों को फर्राटे से सड़कों पर दौड़ाते हैं। जब हमारे नियमों से ट्राफिक नियमों की धज्जियाँ उड़ती है तब पुलिस वालों से बहस करते समय यदा-कदा हम इस कानून के नाम से परीचित होते हैं। याद रखिए कानून की अनभिज्ञता सजा से बचने का बहाना नहीं है। यदि आप सड़क पर वाहन चला रहे हैं तो अपनी आँख, कान व ज्ञान चक्षु खुले रखें। ट्राफिक के कायदें-कानूनों के बारे में जानकारी हासिल करें। जुगाड़ से ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर लेना मात्र ही आपके वाहन चालक होने का परिचायक नहीं है। जब तक आपको ट्राफिक संबंधी कानून की जानकारी नहीं होगी और आप उसका पालन नहीं करेंगे। तब तक आप नौसिखियाँ वाहन चालक ही कहलाएँगे।

आज हम जर्मनी, चीन और यूरोप के देशों के ट्राफिक नियमों की बात करें तो वहाँ के नियम बड़े सख्त है। वहाँ रेड लाइट जंप करने, ट्राफिक नियमों का उल्लंघन करने, अनियंत्रित गति से वाहन चलाने, नशा करके वाहन चलाने एवं दुर्घटना में मौत का कारण बनने वाले वाहन चालकों पर न केवल जुर्माना लगाया जाता है बल्कि सामान्य मामलों में कुछ माह तक तथा गंभीर मामलों में हमेशा के लिए ड्राइवर का ड्राइविंग लाइसेंस तक रद्द कर दिया जाता है ताकि वे जीवन भर वाहन चला ही न सके। चीन में ‘हीट एंड रन’ मामले में ड्राइवर का ड्राइविंग लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाता है, नेपाल में शराब पीकर वाहन चलाने वाले चालकों को शराब छोड़ने की न केवल हिदायत दी जाती है बल्कि उन्हें नशा छोड़ने के लिए नशामुक्ति संबंधी क्लासों में भेजा जाता है। यूरोपियन देशों में ट्राफिक ‍नियमों के उल्लंघन पर 20 यूरो यानि की 25,000 रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। हमारे देश में भी वर्ष 2005 में जस्टिस लक्ष्मणन की अध्यक्षता में बनी समीति ने मोटर व्हीकल एक्ट में कुछ अहम बदलावों जैसे कि ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने हेतु न्यूनतम आयु को बढ़ाना, शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करना, ट्राफिक सिग्नलों पर सीसीटीवी कैमरे की अनिवार्यता आदि सुझाव दिए थे लेकिन अमल में ना लाने के कारण ये सुझाव महज कागज़ों पर ही सिमटकर रह गए।  

यह अच्छी बात है कि गोपीनाथ मुंडे की मौत से सबक लेकर भारत सरकार ने भी अब विदेशों के ट्राफिक कायदों का अध्ययन कर भारत के मोटर व्हीकल एक्ट को भी सख्त व प्रभावी बनाने के निर्देश दे दिए है। यह अच्छे दिन आने का एक शुभ संकेत है। दूसरे देशों के ट्राफिक कानूनों की खूबियों को शामिल करने से भारत का मोटर व्हीकल एक्ट भी एक सख्त एक्ट बन जाएगा, जिससे निश्चित तौर पर देश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आने के साथ ही लोगों की सुरक्षा का सरकार का वादा भी पुख्ता होगा। देश में समस्याएँ बहुत है और हमारी सरकार से उम्मीदें भी बहुत है। बस देखना यह है कि हमारे अच्छे दिनों की शुरूआत कब से होती है।
- गायत्री शर्मा 

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