Thursday, July 18, 2013

बॉलीवुड का राजा ... 'राजेश'

राजेश खन्ना की पहली बरसी ... पर लगता है आज भी वह जिंदा है हमारे दिलों में। हमारे रिश्तों में, प्रेम की अठखेलियों में। लगता है उनकी मदहोश कर देने वाली मुस्कुराहट आज भी प्रेमियों को खुश देखकर दुआएँ देती है। फिल्मों में रोमांस को एक नई पहचान देने वाले राजेश खन्ना की मिसाल अब तक प्रेमी-‍प्रेमिका के रिश्तों में दी जाती है। उनके डायलॉग आज भी प्रेम के रिश्तों में जीवंतता पैदा करते हैं। सच कहें तो उनका लुक, उनकी अदायगी, उनकी आवाज ... वाकई में लाजवाब थी। जितनी कामयाबी इस सितारे ने अपने फिल्मी करियर में देखी। उससे कही अधिक सूनापन व अकेलापन उनकी जिंदगी में पसरा था। कहने को बॉलीवुड के इस सुपरस्टार का जीवन व जिंदगी के अंतिम क्षण तन्हाई व दर्द के नाम रहे। मौत की बाद भी उनकी संपत्ति को लेकर हुए विवाद खुलकर सामने आए। राजेश खन्ना की पहली बरसी पर मेरी कलम से इस रोमाटिंक हीरों के प्रति श्रृद्धांजलि - 
  
राजेश खन्ना, बॉलीवुड जगत का एक चमकता सितारा। जिसके कामयाबी की बुलंदी सितारों की ऊँचाईयों को छूती थी। 1970 का दशक बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना का दौर था। यह वह दौर था, जब रोमांस के इस किंग की बॉलीवुड में एकतरफा तूती बोलती थी। अपनी दिलकश रोमांटिक अदाएँ, मस्तानी चाल, आकर्षक रंग-रूप और दमदार अदाकारी के बूते पर राजेश खन्ना ने फिल्मों के पर्दे पर रोमांस को एकदम जीवंत कर दिया।

‘राजेश’ के प्रेम की दीवानगी :
कहते थे कि राजेश खन्ना की कामयाबी के दौर में लड़कियाँ इस रोमाटिंक हिरों की एक झलक मात्र पाने को उनके बँगले व स्टूडियों के बाहर घंटों तक टकटकी लगाएँ खड़ी रहती थी। लड़कियों की अपने इस चहेते हीरों के प्रति दीवानगी का आलम यह था कि राजेश खन्ना के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने के लिए लड़कियाँ उन्हें अपने खून से लिखे प्रेम-पत्र भेजती थी और राजेश के न मिलने पर उनकी कार को ही अपने लिपस्टिक लगे होठों से चूम लेती थी। उस वक्त काका की कार लड़कियों के ‘किस’ से रंग-बिरंगी हो जाया करती थी। अपने हीरों के प्रति दीवानगी को दिखाने के लिए कोई लड़की तो अपने इस हिरों की तस्वीर से ही शादी कर लेती थी तो कोई उन्हें मन ही मन अपना पति मानकर उनके नाम का सिंदूर लगाकर उनकी पत्नि बन जाती थी।
वाह, वाकई में खुशनसीब था वह हिरों, जिसने प्रेम की इस अति को देखा व महसूस भी किया। देवता, प्रेमी व एक अच्चे हिरों की तरह सराहे जाने वाले राजेश के दिवानों की दिवानगी उम्र से परे थी। न केवल ‍बच्चे, बड़े बल्कि समाज के हर तबके व उम्र के लोग काका के दीवाने थे और दीवाने रहेंगे।   

प्यार की उम्र नहीं :
राजेश खन्ना की कामयाबी से प्रभावित होकर 70 के दशक में पैदा होने वाले अधिकांश लड़कों के नाम भी ‘र’ से ‘राजेश’ रखे जाते थे। कई लोगों का राजेश नाम रखने का कारण ही बॉलीवुड का रोमाटिंक हीरों राजेश खन्ना ही है। खैर छोडि़ए इन बातों को ...। रोमांस के इस किंग ने शादी, प्यार और फिल्मों तीनों में कमाल और चमत्कार कर अपने प्रशंसकों को चौंकाया। मुमताज के साथ फिल्मों में बेमिसाल जोड़ी बनाने वाले राजेश खन्ना ने शादी की तो अपने से 15 साल छोटी लड़की डिंपल कपाडि़याँ। फिल्म बॉबी की डिपंल राजेश को इतनी भाई कि ऋषि कपूर से पहले ही राजेश ने डिपंल पर अपनी मुहर लगा दी। यही वजह थी कि जहाँ पूरा बॉलीवुड राजेश और डिंपल की शादी में शरीक हुआ। वहीं राजेश खन्ना इस शादी से नदारद नजर आएँ।
राजेश और डिपंल की शादी को देखकर यह कहना सही होगा कि प्यार में न उम्र की सीमाएँ होती है और न ही जात-पात का बँधन। यह तो दिल से दिल का बँधन है। इस सुपरस्टार की कामयाबी इस कदर थी कि राजेश खन्ना की शादी के बाद देश भर के थिएटरों में कोई भी फिल्म रिलीज होने से पहले राजेश खन्ना की शादी का विडियों दिखाया जाता था। जितनी तेजी से राजेश और डिपंल पर प्रेम का सुरूर चढ़ा और दोनों ने शादी की, उतनी ही तेजी से उम्र बढ़ने के साथ प्यार की चमक फीकी पड़ने के साथ-साथ इन दोनों में अलगाव की खबरे भी आने लगी। शादी के दस सालों बाद ही डिंपल और राजेश के दापंत्य की पटरी आपसी तालमेल के ट्रेक से उतर गई और राजेश और डिपंल के मध्य अलगाव खुलकर सामने आने लगा, जिसके चलते ये दोनों एक-दूसरे से अलग हो गए।     
फिल्म और राजनीति दोनों में सफलता :  
न केवल फिल्म बल्कि राजनीति में भी राजेश खन्ना के प्रशंसकों ने उनका बखूबी साथ निभाया। राजनीति के क्षेत्र में राजेश खन्ना वर्ष 1991 से 1996 तक सक्रिय रहे। वर्ष 1991 में राजेश खन्ना ने बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ा। उस वक्त यह सुपरस्टार लगभग 1000 वोटों के अंतर से आडवाणी से हारे थे। इस हार में भी साफ तौर काका की सफलता झलक रही थी क्योंकि आडवाणी जैसे दिग्गज नेता को काँटे की टक्कर देना हर किसी के बस की बात नहीं थी। राजेश खन्ना संभवत: भारत के पहले सुपरस्टार थे, जिनका जिक्र कोर्स की किताबों में शामिल किया गया था। मुबंई यूनिवर्सिटी की किताबों में ‘द करिज्मा ऑफ राजेश खन्ना’ शीर्षक से राजेश खन्ना को शामिल किया गया।

लगातार 15 सुपरहिट फिल्में :  
1969 से 1971 तक लगातार 15 सुपरहिट फिल्में देने वाले तब के और अब तक के एकमात्र सुपरस्टार राजेश खन्ना ही है। उनकी इन सुपरहिट फिल्मों में आरधना, डोली, बँधन, इत्तेफाक, दो रास्ते, खामोशी, सफर, दि ट्रेन, कटी पतंग, सच्चा-झूठा, आन मिलो सजना, मेहबूब की मेहँदी, दुश्मन, हाथी मेरे साथी और आनंद है। काका ने तकरीबन 128 फिल्मों में लीड हिरों के तौर पर काम किया और 16 बार उन्हें फिल्म फेयर अवार्ड से भी नवाज़ा गया। 

किशोर और राजेश का साथ :
किशोर कुमार की आवाज राजेश खन्ना के व्यक्तित्व पर कुछ इस तरह से फँबी की, किशोर और राजेश खन्ना की गायक और अभिनेता के रूप में जुगलबंदी ने लगातार कई हिट फिल्में दी। लगभग 90 फिल्मों में किशोर दा ने काका के लिए गीत गाएँ। किशोर की गायकी को राजेश खन्ना के बारे में यह कहकर सराहा जाता था कि यह आवाज किशोर की नहीं बल्कि राजेश खन्ना की ही है। गायक के तौर पर किशोर की कामयाबी की शुरूआत भी राजेश खन्ना पर फिल्माएँ गीतों से ही हुई थी। यही वजह है कि कई फिल्मों में काका के लिए गीत गाने वाले किशोर ने राजेश खन्ना की फिल्म ‘अलग-अलग’ के लिए फ्री ऑफ चार्ज गीत गाए।


अंतिम बिदाई पर रो पड़े बदरा :
न केवल राजेश खन्ना के प्रशंसक बल्कि प्रकृति ने भी राजेश खन्ना की अंतिम बिदाई पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। करीब 9 लाख लोग काका को अंतिम बिदाई देने के लिए 19 जुलाई 2012 को राजेश खन्ना की अंतिम यात्रा में शामिल हुए। ‍न केवल काका के प्रशंसक बल्कि प्रकृति ने भी रिमझिम बरसकर अपनी नम आँखों से काका को बिदाई दी। कहने को तो राजेश खन्ना का शरीर अब पंचतत्व में विलीन हो गया है लेकिन उनकी कामयाबी की गूँज सदा के लिए भारतीय फिल्म जगत में अपनी उपस्थिति को दर्ज कराएगी।

राजेश खन्ना पर फिल्माएँ सदाबहार गीत :    
जिंदगी कैसी है पहेली ....
मेरे सपनों की रानी ...  
कुछ तो लोग कहेंगे ...
रूप तेरा मस्ताना ...
कोरा कागज था ये मन मेरा ...
जिंदगी एक सफर है सुहाना ...
कहीं दूर जब दिन ढ़ल जाए  ...
छुप गए सारे नज़ारे ...
यूँ ही तुम मुझसे बात करती हो ... 

- गायत्री 

चित्रों हेतु साभार : दि इंडियन एक्सप्रेस (http://www.indianexpress.com/picture-gallery/fans-remember-rajesh-khanna-on-his-first-death-anniversary/3076-4.html

तेजाब की जलन है बाकी ...

तेजाब की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैये से मुझे बहुत खुशी हुई है। यह सुप्रीम कोर्ट की फटकार का ही असर है कि केंद्र सरकार ने तेजाब की बिक्री को नियंत्रित करने के साथ ही शर्तों में बाँधने के लिए 'प्वाइजन पजेशन एण्ड सेल्स रूल्स 2013' का मसौदा तैयार किया है। जिसके तहत तेजाब की बिक्री हेतु दुकानदार को लाइसेंस लेना होगा, जो कि 5 वर्ष तक के लिए मान्य होगा। इसी के साथ ही उसे सेल्स का रजिस्टर भी मेंटेन करना होगा। जिसमें उसने किस व्यक्ति को कितना और किस प्रयोजन हेतु तेजाब बेचा है। विक्रेता को तेजाब खरीदने वाले व्यक्ति का नाम, पता, टेलीफोन नंबर आदि से संबंधित जानकारी अपने सेल्स रजिस्टर में दर्ज करना होगी। विक्रेता के साथ-साथ क्रेता को भी तेजाब खरीदते समय अपना परिचय पत्र (जिसमें उसका पता दिया हो) ‍दुकानदार को दिखाना अनिवार्य होगा। इसी के साथ ही जो लोग तेजाब हमले के शिकार होते हैं, उन्हें राज्य सरकार 3 लाख रूपए का मुआवजा, पुर्नवास व इलाज का खर्च देगी।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला महिलाओं की सुरक्षा हेतु लिया गया एक ऐतिहासिक फैसला है। जिससे तेजाब हमलों में कभी आने की उम्मीद तो जरूर की जा सकती है। हालांकि यह फैसला उन महिलाओं की जिंदगी और खुशियों को वापस नहीं लौटा सकता है। जिनके बदन ने तेजाब की जलन को न सिर्फ महसूस किया गया है बल्कि उसकी पीड़ा को सामाजिक तिरस्कार के रूप में भोगा भी है। 
क्या आपको नहीं लगता है कि तेजाब की खुली बिक्री पर अकुंश लगाने हेतु सरकार को टॉयलेट क्लीनर के तौर पर भी तेजाब का विक्रय पूर्णत: प्रतिबंधित कर देना चाहिए क्योंकि टॉयलेट क्लीनर के नाम पर कोई भी व्यक्ति आसानी से तेजाब खरीद सकता है। जब हमारे पास तेजाब के अलावा भी टॉयलेट क्लीनर के अन्य विकल्प मौजूद है तो फिर तेजाब जैसा घातक द्रव्य ही क्यों? खैर जो भी हो, सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को तेजाब हमलों से पूरी तो नहीं पर कुछ हद तक संतोषजनक सुरक्षा का आश्वासन तो प्रदान किया ही है।    
आज मैं उस लड़की को दिल से सलाम करती हूँ। जिसके सात सालों के सतत संघर्ष व हिम्मत की बदौलत सुप्रीम कोर्ट को विवश होकर तेजाब की बिक्री पर अंकुश लगाने हेतु निर्णय लेना पड़ा है। हालांकि कोर्ट में इस मामले का अंतिम फैसला होना अभी बाकी है।  

-          गायत्री 

डर का अंत हो .....

हर रात के खत्म होने के बाद 
अलसुबह से मन में दस्तक देता है डर 
हर आहट पर चौकन्नी हो जाती है निगाहें 
और करता है जिंदगी को खत्म करने का मन 

होते है दुनिया में कुछ लोग ऐसे
जो खेलते है खुशियों और मुस्कुराहटों से 
करते हैं जिस्म के सौदे 
और गुर्र्राते है अपने थोथे दावों पर 

किसी को डराकर ये लेते हैं मजे     
और तोड़ते है लोगों के भरोसे
दर्द देने में इन्हें मजा आता है 
सिसकियों में कराहती हर आह से मन इनका ललचाता है 

पर कब तक ..... 
.... 
डर, सन्नाटा और खामोशी की भी उम्र होती है 
छटपटाते मन में अब हर दुआ, बददुआ बनकर रोती है 
जब मच जाती है दर्द की अति से हाहाकार
तब दिखाता है ईश्वर भी अपना चमत्कार 
पापी को मिलती है पाप की सजा 
और साथ ही सजा को भोगता है उसका पूरा परिवार।
- गायत्री 

Tuesday, July 16, 2013

तेजाब की बौछार, मौत की बयार ....

तेजाब, जिसकी एक बूँद भी चमड़ी का माँस का लोंदा (ढ़ेर) बनाने के लिए पर्याप्त होती है। सोचिए जब इस तेजाब की फुहार किसी लड़की के चेहरे पर दुराशय से फेंकी जाती है, तब उस लड़की के सपनों के साथ ही उसके भविष्य पर भी सदा के लिए ग्रहण लग जाता है। सामाजिक व व्यक्तिगत जीवन में उलाहना के साथ ही वह लोगों की घृणा व हीन भावना का शिकार बन सदा के लिए सजा व बोझ की तरह अपने जीवन को काटती है। ऐसे अपराधों व घटनाओं में न्याय की उम्मीद तो समय व सालों के बीतने के साथ ही या तो बढ़ती या घटती नजर आती है क्योंकि हमारे यहाँ न्याय को सत्ता के रसूकदारों व पूँजीपतियों के हाथों क‍ी बपौती है। आमजन के लिए न्याय तो बस भविष्य में उम्मीदों की कोरी कल्पना ही है। 
       हालाँकि सालों साल में कभी कभार किसी प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट भी जनता के भले के लिए कुछ ऐतिहासिक निर्णय देती है। जिससे आमजन में न्याय के प्रति मर चुका विश्वास पुन: जीवित होता नजर आता है। याचिकाकर्ता लक्ष्मी के प्रकरण में सात साल बाद एक ऐसा ही जनहितेषी निर्णय लेने की तैयारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट बाजार में 'तेजाब की खुलेआम बिक्री' पर अकुंश लगाने की तैयारी कर रही है। सरकार को तेजाब की बिक्री के संबंध में कोई ठोस निर्णय लेने के लिए कोर्ट ने उन्हें 16 जुलाई तक का समय दिया है। यदि सरकार इस संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है तो सुप्रीम कोर्ट सख्त कानून बनाकर तेजाब की सर्वत्र सुलभता व खुलेआम बिक्री पर कानून बनाकर अपने इस फैसले को सख्ती से लागू कराएगी। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रूख को देखते हुए भलाई की इस पहल में अपनी सहभागिता निभाते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने तेजाब की खुली बिक्री पर रोक लगाते हुए सजा का प्रावधान किया है। लेकिन केवल एक राज्य के तेजाब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने मात्र से कुछ नहीं होगा। देश की तस्वीर तो तब बदलेगी, जब सभी राज्य सरकारें एकमत होकर तेजाब की तबाही को रोकने के लिए इसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगाएगी। 

       क्या आपको भी लगता है कि तेजाब की बिक्री पर सख्ती से प्रतिबंध लगाने हेतु कोर्ट को ही कोई निर्णय लेना चाहिए या राज्य सरकारों को स्वयं अपने राज्य में तेजाब की खुलेआम बिक्री पर प्रतिंबध लगा देना चाहिए? जिससे कि तेजाब से मची तबाही से अपना चेहरा, आँखे, हाथ व खूबसूरती को खोने वाली लडकियों व महिलाओं को न्याय मिल सके तथा महिलाओं पर हो रहे तेजाब हमलों पर अंकुश लग सके। कृपया अपनी प्रतिक्रियाओं से मुझे अवगत कराएँ।     

Thursday, July 11, 2013

प्यार

प्यार की उम्र क्या
शायद एक नजर भर ...
पलके मूँदते ही
पल में ओझल ...
महसूस करो तो सब कुछ
कैद करना चाहो तो कुछ नहीं
एक प्यारा सा अहसास,
कभी न पूरी होने वाली अधूरी प्यास
दूर रहकर भी सबसे करीब

जिसे‍ ‍यह मिले ... वो कहलाता है खुसनसीब 
- गायत्री