Sunday, January 19, 2014

तू आता है और चला जाता है ...

तू आता है और चला जाता है 
दबे पाँव उनींदी आँखों का सपना बन 
सपनों को हकीकत का धरातल दिखाता है 
तू आता है और चला जाता है
जब सरसराते हैं गालों पर बाल 
जब सूरज को देख अलसाती है आँखे 
तब तू मिलन के मीठे सपने सजाता है 
तू आता है और चला जाता है 
आती है फिजाओं में कस्तूरी की महक 
मन ही मन कुछ हुआ जाता है 
खुद को आईने में देखूँ तो आईना शरमाता है 
तू आता है और चला जाता है  
कोरे पन्नों पर उकेरती हूँ कल्पनाएँ 
तब तू दिलो दिमाग पर छा जाता है 
अल्फाज दिल में उठते हैं मेरा मन कवि बन जाता है 
तू आता है और चला जाता है .....
- गायत्री 

Saturday, January 18, 2014

डॉ. सैयदना बुरहानुद्दीन साहब हुए जन्नतनशीं

जन्नतनशीं हुए अपने आका मौला की पार्थिव देह की एक झलक पाने मात्र को बोहराजनों में उत्साह देखते ही बनता था, दुनियाभर से डॉ. सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन साहब के अनुयायी उन्हें अंतिम विदाई देने मुबंई पहुँचे। बोहरा समाज के धर्मगुरू के इंतकाल की खबर वाकई में एक दुखद खबर थी, जिसे सुनने मात्र से ही बोहरा समाज के हर परिवार में शोक की लहर छा गई। दुनियाभर के बोहरा समाज के लोग ताबड़तोड़ सैयदना साहब की आखिरी झलक पाने को मुबंई पहुँच गए। लेकिन इसे उनके अनुयायियों का अति उत्साह कहें या आतुरता भरी अति श्रृद्धा कहें, जिसके बहाव ने मुबंई में भगदड़ का ऐसा तांडव रचा कि अपने आका-मौला के निधन पर शोक व्यक्त करने गए कई बोहराबंधु स्वयं मौत की नींद सो गए। करीब 17 लोग इस भगदड़ में मारे गए और लगभग 60 लोग घायल हो गए। सच में यह घटना बेहद ही दुखद व चिंताजनक है। क्या भावनाओं का इतना अतिरेक और इस तरह से भीड़ के जनसैलाब के रूप में उसकी अभिव्यक्ति उचित है? क्या भीड़ का बेकाबू होना अति भीड़ व सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने की वजह थी?    
सामाजिक एकजुटता व अपने धर्मगुरू के प्रति बोहरा समाज के लोगों की अगाध श्रृद्धा वाकई में काबिले तारीफ है। अपने धर्मगुरू के आदेश पर बोहरालोग कुछ भी कर सकते हैं। यह किसी जोर जबरदस्ती से नहीं होता बल्कि सैयदना साहब के प्रति उनके अनुयायियों की श्रृद्धा व सम्मान का परिचायक है। यहीं वजह है कि बोहरा समाज आज भी एकजुट है। जब भी कभी जहाँ भी डॉ. सैयदना साहब का आगमन होता, उस क्षेत्र का समूचा बोहरा समाज वहाँ एकत्रित हो जाता। अपने धर्मगुरू की दीदार मात्र के लिए बोहराजनों में उत्साह व इंतजार देखते ही बनता था। 17 जनवरी 2014, शुक्रवार शाम को जब बोहरा समाज के 52 वें धर्मगुरू डॉ. सैयदना मोहम्मद बुहरूद्दीन साहब के इंतकाल की खबर जैसे-जैसे देश में आग की तरह फैली। वैसे-वैसे बोहरा समाजजनों का मुंबई की ओर ताबड़तोड़ प्रस्थान होने लगा। मुबंई जाने वाली ट्रेनों में अतिरिक्त कोच बढ़ाएँ गए, फ्लाइटों में टिकिटों की ताबड़तोड़ बुकिंग शुरू हो गई और जैसे-तैसे धक्का-मुक्की खाकर बोहरा जन मुबंई पहुँचे। वाकई में अपने धर्मगुरू या यूँ कहें अपने भगवान को अंतिम विदाई देना किसी भी बोहराजन के लिए सौभाग्य से कम नहीं था। सैयदना साहब की इस अंतिम यात्रा के हर पड़ाव पर पुष्प वर्षा के साथ सड़क पर अश्रुवर्षा भी हो रही थी। यह दृश्य वाकई में भावनाओं के अतिरेक का परिचायक था। कभी लगता है डॉ. सैयदना हमारे बीच से चले गए और कभी लगता है वह यहीं कही है, हमारे आसपास है। आज भी और कल भी वह हमारे मार्गदर्शक व प्रेरक बनकर वे सदैव हमारे बीच में रहेंगे।
- गायत्री  

Friday, January 17, 2014

सुनंदा पुष्कर की मौत या आत्महत्या?

केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध स्थितियों में मौत। हाल ही में सोशल मीडिया में दोनों पति-पत्नी के दापंत्य संबंधों के बीच आई तकरार सार्वजनिक रूप से तब सामने आई थी। जब शशि थरूर के पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के साथ प्रेम संबंधों को लेकर सुनंदा पुष्कर का मेहर को किया गया तीखा ट्विट व गुस्से में मेहर तरार को आईएसआई एजेंट तक कहने का ट्विट सार्वजनिक रूप से सामने आया था। मीडिया पर इस मुद्दे के उठने के बाद इस हाईप्रोफाइल जोड़े ने मीडिया के सवालों से बचने के लिए और अपने दापंत्य रिश्तों को संभालने के लिए यह ट्विट किया था कि हम दोनों पति-पत्नी के बीच सब कुछ ठीक चल रहा है। लेकिन इस ट्विट के आने के 24 घंटों के भीतर ही सुनंदा की दिल्ली के लीला होटल के कमरा नंबर 345 में मिली संदिग्ध लाश सुनंदा की मौत के कारणों को संदिग्धता के घेरों में डालती है।

जहाँ सुनंदा शशि की तीसरी पत्नी थी, वहीं शशि भी सुनंदा के तीसरे पति थे। यदि हम कुछ साल पीछे जाएँ तो आईपीएल मैच में केरल के शशि और काश्मीर की सुनंदा के प्रेम संबंधों की खबर पहली बार सामने आई थी। उसके बाद 50 वर्ष से अधिक उम्र के इन दोनों प्रेमियों ने सार्वजनिक रूप से इस प्रेम को स्वीकार कर वर्ष 2010 में विवाह कर लिया था। सुनंदा और शशि का प्रेम इतना गहरा था कि इस प्रेम को लेकर उठे विवाद के चलते उस वक्त शशि ने कांग्रेस पार्टी में अपने महत्वपूर्ण पद से इस्तीफा भी दे दिया था।

हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आई सुनंदा शशि के रिश्तों में तकरार की खबर यानि कि सुनंदा व शशि के बीच वो (मेहर) की दस्तक की खबर ही क्या सुनंदा की मौत की वजह है? यह एक अहम सवाल है। ट्विटर पर ही शशि व सुंनदा के बीच की तकरार दो-तीन दिन पहले सार्वजनिक हुई थी और इस तकरार की वजह थी पाकिस्तानी महिला पत्रकार मेहर तरार के साथ शशि की दोस्ती। इस दोस्ती से तंग आकर सुनंदा ने अपनी भड़ास निकालने के लिए ट्विटर पर मेहर को आईएसआई एजेंट तक कह दिया था, जिससे गुस्साई मेहर ने भी मीडिया के सामने सुनंदा को खरी खोटी सुनाई थी।

आपकी जानकारी के लिए शशि थरूर के ट्विटर पर 20 लाख से अधिक फालोअर्स है यानि कि उनके ट्विट पर आने वाली खबरों का तुरंत असर होता है, उस पर तुरंत प्रतिक्रिया होती है। यही वजह है कि मीडिया के द्वारा शशि व सुनंदा के रिश्तों के बीच मेहर की दखल के जिक्र की खबर के तूल पकड़ते ही शशि व सुनंदा ने सार्वजनिक रूप से यह ट्विट किया कि हम दोनों पति पत्नी के बीच सबकुछ ठीक चल रहा है। लेकिन मौत वाले दिन यानि कि आज के दिन सुनंदा के ट्विट की यह लाइन ‘आई गॉट टू गो विद जॉय’ कुछ ओर ही ईशारा कर रही है, जो भी हो। मुझे लगता तो नहीं है परंतु आशा है राजनीतिक दबाव से परे रहकर इस मामले की निष्पक्ष रूप से जाँच हो और सार्वजनिक रूप से सुनंदा की मौत के कारणों का खुलासा हो।
- गायत्री 

Monday, January 13, 2014

कैसी हठ पर अड़े हो दोस्त?

इस बार तुम कैसी हठ पर अड़े हो दोस्त?
ईगो में तो तुम मुझसे भी बड़े हो दोस्त।
मन ही रोते हो बीते दिनों को याद कर
भीड़ देख क्यों मुस्कुरा पड़े हो दोस्त?
सबकुछ है साफ-साफ, सुलझा-सुलझा
फिर किस धुँध को साफ करने में तुम लगे हो दोस्त?
झूठ ही सही 'हार' मान लो हमारे लिए
क्यों 'जीत' के इंतजार में ही तुम खड़े हो दोस्त?
क्या त्योहारों पर औपचारिकताएँ ही होगी पूरी
क्या अब कभी पहले सी सहजता से तुम हमसे मिलोगे दोस्त?
- गायत्री