Wednesday, July 21, 2010

एक सुनहरी शाम

इस धुंध में भी एक चेहरे की
मधुर मुस्कान बाकी है।
यादों के पुरिंदे में अब तक
एक सुनहरी शाम बाकी है।
बीत गया हर लम्हा
खत्म हो गया ये साल
लेकिन अभी भी कुछ यादें बाकी है।

एक साथी सफर का
अब तक याद है मुझे।
उस अजनबी रिश्ते का
अब तक अहसास है मुझे।
खुशियाँ इतनी मिली कि
झोली मेरी मुस्कुराहटों से भर गई।‍
जिंदगी में सब कुछ मिला मुझे
पर तेरी कमी खल गई।

इस साथी को 'अलविदा' कहना
खुशियों से जुदा होना था,
अपनों से खफा होना था।
परंतु वो रहेगा कायम हमेशा
मेरे होठों की मुस्कान में,
इन आँखों की तलाश में,
मेरी लेखनी के शब्दों में .....

- गायत्री शर्मा

यह कविता मेरे द्वारा अपने वेबदुनिया वाले ब्लॉग पर 2 जनवरी 2009 को प्रकाशित की गई थी।

नजर आती है वो सामने वाली कुर्सी

बार-बार मेरी निगाह मेरे सामने वाली कुर्सी पर जाकर टिक जाती है। जहाँ कभी वेबदुनिया के हमारे साथी पत्रकार अभिनय कुलकर्णी बैठा करते थें। उनकी जितनी कमी पिछले महीने उनके द्वारा वेबदुनिया को खुशी-खुशी अलविदा कहकर जाने से न हुई। उससे ज्यादा कमी आज उनके दुनिया छोड़ जाने से हो रही है। अब बार-बार मेरी नजर उसी खाली‍ पड़ी कुर्सी पर जाकर ठहर जाती है। जहाँ कभी मराठी भाषा में हँसी-ठिठौली की व फोन पर बातचीत की आवाजें मेरे कानों में पड़ा करती थी।

आज भी जिंदा हूँ मैं :
मराठी वेबदुनिया का एक सशक्त पत्रकार 19 जुलाई 2010 की रात को हम सभी से रूठकर अंधेरे के आगोश के साथ ही रात ही को पौने दो बजे सदा के लिए मौत की गहरी नींद में सो गया। जब दूसरे दिन इस दुर्घटना की खबर हम सभी को लगी। तब अचानक वो मँजर आँखों के सामने आ गया। जब कभी वेबदुनिया के कार्यक्रमों में हम सभी एक साथ बैठकर मुस्कुराते थें। नवरात्रि, गणेशोत्सव ... आदि अवसरों में हमेशा हँसते-मुस्कुराते अभिनय जी का चेहरा आज मेरी आँखों के सामने आकर मानों बार-बार यहीं कह रहा हो कि मैं मरा नहीं हूँ। मैं जिंदा हूँ आप सभी के आत्मविश्वास में, आपके दिलों में आपक‍ी ऊर्जा बनकर। मैं एक पत्रकार हूँ। जो कभी मरता नहीं। जिसकी लेखनी की सशक्त आवाज उसे हमेशा आपकी यादों में जीवित रखती है। ऐसी प्रतिध्वनि के कानों में गूँजते ही मुझे लगा कि अब राह में बिछड़े हमारे साथी की आवाज और उसके परिवार का संबंल हम लोग है। जो इस दु:ख की घड़ी में कुलकर्णी परिवार का साथ देने के साथ ही अपनी निष्पक्ष व सच्ची पत्रकारिता द्वारा अपने साथी को सच्ची श्रृद्धांजलि अर्पित करेंगे।

खुशियों पर काल का कहर :
अभिनय कुलकर्णी को महाराष्ट्र में एक अच्छी नौकरी मिली थी। जिसके पदभार को ग्रहण करके फिर से अपने परिवारजनों के चेहरों पर खुशियों की मुस्कुराहट बिखेरने के लिए यह पत्रकार सपत्निक नासिक जा रहे थे। लेकिन समय को इनकी खुशियाँ रास नहीं आई और काल ने इन पर ऐसा कहर बरपाया कि बीच राह में ही धूलिया के करीब इनकी बस की ट्रक से हुई जोरदार टक्कर ने हमसे हमारा एक हँसमुख व प्रतिभावान साथी पत्रकार हमेशा हमेशा के लिए छीन लिया और हमें हँसते-मुस्कुराते अभिनय कुलकर्णी की यादों के भँवर में छोड़ दिया।

किसी के साथ भी ऐसे हादसें न हो :
बड़े ही शालीन, सभ्य व बेदाग चरित्र वाले अभिनय कुलकर्णी की कमी को कोई पूरा नहीं कर सकता पर वक्त के आगे किसी की नहीं चली है। हम आज है कल नहीं। हममें से किसी के भी साथ ऐसा हादसा घटित हो सकता है। अभिनय जी को नम आँखों से श्रृद्धांजलि देने के साथ ही मैं बस यही कहना चाहूँगी कि आखिर क्यों हमारे वाहनों की रफ्तार इतनी अधिक बढ़ जाती है कि ये बेलगाम होते वाहन समय की रफ्तार को भी मात देकर हमारी जिंदगियों से खेल जाते हैं और हमें दे जाते हैं तन-मन में सिहरन पैदा करने वाली दुर्घटनाओं की यादें।

मेरे साथियों! आओं और आवाज उठाओं ताकि इस बेलगाम होते ट्राफिक पर लगाम कसी जाएँ और हम बेखौफ होकर अपने परिवार के साथ सड़कों पर वाहनों से सुखद यात्रा कर सके। कही न कही किसी वाहन चालक की लापरवाही व तेज रफ्तार ने ही हमारे साथी को हमेशा के लिए मौत की गहरी नींद में सुला दिया है।

अंत में अभिनय जी को श्रृद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही उन्हें मेरा शत-शत नमन।

Tuesday, July 20, 2010

कैमरे के सामने मैं और नेहा हिंगे

आज दूरदर्शन के लिए मुझे नेहा हिंगे का साक्षात्कार लेने का मौका मिला। इसी बहाने मैंने नेहा को करीब से जाना। साक्षात्कार के दौरान मेरे बगल वाली कुर्सी पर बैठी नेहा के चेहरे पर अब भी वह चमक बाकी थी, जो उनके चेहरे पर उस वक्त थी। जब वह फेमिना मिस इंडिया इंटरनेशनल 2010 बनी थी। नेहा के साथ ही स्टूडियों में उनकी माताजी,बहन,बुआ और पिताजी थें। जिनका साथ पाकर नेहा बहुत खुश थी।

अपने परिवार के साथ अपने पसंदीदा शहर इंदौर की यात्रा पर आई नेहा को इस शहर ने बहुत प्यार और सम्मान देकर सिर आँखों पर बिठाया और नेहा ने भी अपनी मधुर मुस्कुराहट और प्यारी सी बोली से सभी इंदौरवासियों का दिल जीत लिया।

यदि साक्षात्कार की बात करें करीब आधे घंटे तक चला यह साक्षात्कार इतना शानदार रहा कि उसने नेहा के साथ साथ मेरे भी चेहरे पर मुस्कुराहट बिखेर दी। इस साक्षात्कार के बाद मुझे भी पता चला कि सिर पर मिस इंडिया का सम्माननीय क्राउन पहनने वाली नेहा हकीकत में भी इस क्राउन की असली हकदार है। सच कहूँ तो नेहा ने अपनी खुली आँखों से सपने देखे व उन्हें हकीकत बना हम सभी को बता दिया कि आजकल लड़कियाँ भी हर मामले में लड़कों से आगे है। नेहा आप भविष्य में भी बहुत नाम कमाएँ। ऐसी मेरी शुभकामनाएँ है।

- गायत्री शर्मा

नेहा हिंगे से मेरी चर्चा के कुछ अंश

मध्यप्रदेश के देवास शहर से अपने सफर की शुरूआत करने वाली नेहा ने जो भी सपना देखा। उसे पूरा कर दिखाया। बचपन से ही 'मिस इंडिया' बनने का ख्वाब देखने वाली नेहा आज बचपन में देखे अपने सपने को जी रही है। नेहा के 'फेमिना मिस इंडिया इंटरनेशनल 2010'का क्राउन जीतने के दो दिन बाद जब मेरी नेहा से फोन पर बातचीत हुई। तब उनके जीत की खुशी उनके शब्दों में घुली मिठास से झलक रही थी।

मृदुभाषी नेहा से मेरी उस दिन से लेकर अब तक कई बार टेलीफोन पर बातचीत हो चुकी है पर मुझे इस बात की बेहद प्रसन्नता है कि उनसे हुई पहली चर्चा में मुझे इस बात का तनिक भ‍ी आभास नहीं हुआ कि यह वहीं लड़की है, ‍‍‍जिसने दो ‍दिन पहले 'फेमिना मिस इंडिया इंटरनेशनल' का खिताब जीता है। स्वयं की जीत पर न कोई गुरूर और न ही बातचीत में किसी तरह का अक्खड़पड़ ... कुछ ऐसी ही है नेहा। जिसका बस एक ही शौक है और वह है मोबाइल को घंटों कान से लगाकर बतियाने का।

खुशमिजाज और अलमस्त नेहा की आवाज फोन पर पूर्णत: आत्मविश्वास से लबरेज थी। बातों ही बातों में नेहा ने मुझे बताया कि बचपन में वो बार-बार आईने में खुद को देखकर तरह-तरह के पोज़ बनाती थी और खुश जाती थी। अपने बचपन में हर लड़की की तरह नेहा भी यही सोचती थी कि मैं भी बड़ी होकर 'मिस इंडिया' बनूँ। नन्ही नेहा का यह सपना आज हकीकत बन गया है और जब कोई सपना हकीकत बनता है तो उसे जीने का मजा ही कुछ और होता है।

पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर नेहा जितना अपने माता-पिता और बहन से प्यार करती है। उतना ही प्यार वह अपनी बुआ से भी करती है। तभी तो फोन पर बात करते हुए बार-बार नेहा ने मुझसे कहा कि प्लीज मैडम, आप भले ही मेरे इंटरव्यू में मेरे माता-पिता का नाम मत देना पर देवास में रहने वाली मेरी बुआ का नाम मेरे नाम के साथ जरूर देना क्योंकि मैं उनसे बहुत प्यार करती हूँ। इसी के साथ ‍ही नेहा ने मुझे उनके स्कूली दिनों की यह बात भी बताई कि जब वह देवास में स्कूल जाती थी। तब उनकी बुआ हर रोज लंच टाइम में अपनी प्यारी सी भतीजी को चॉकलेट खिलाती थी। नेहा इसे अपनी बुआ की खिलाई चॉकलेट का ही असर मानती है कि आज वह सबसे बहुत मीठा बोलती है।

कामयाबी की इस बुलंदी को छुने के बाद भी नेहा का अपनी जमीन से जुड़ाव है। आज भी वह देवास में बिताए अपने बचपन के दिनों को याद करती है। देवास का अपना घर, बचपन के खेल, देवास की माहेश्वरी की मिठाईयाँ, बचपन के वो साथी सभी आज भी मीठी याद बनकर नेहा के यादों के पिटारे में बंद है, जिसे खोलते ही वह अपने बचपन में खो जाती है। नेहा की दिली ख्वाहिश है कि बुढापे में भी यदि ईश्वर ने चाहा तो वह देवास में आकर ही अपने जीवन का बचा वक्त बिताना चाहेगी।
- गायत्री शर्मा

Thursday, July 15, 2010

अब आप भी जुड़े नेहा हिंगे के साथ

आज हम सभी युवाओं के लिए गौरव की बात है कि हमारे प्रदेश की नेहा हिंगे ने फेमिना मिस इंडिया इंटरनेशनल 2010 का क्राउन जीता है। आत्मविश्वास व सकारात्मक ऊर्जा से लबरेज नेहा पूना में रहकर आज भी मध्यप्रदेश के देवास व इंदौर शहरों को नहीं भूल पाई है। इन दोनों शहरों में बिताए अपने बचपन के दिनों का जिक्र करते वह नहीं थकती है। आखिर हो भी क्यों न,इन दोनों शहरों से नेहा की बचपन की यादें जो जुड़ी है।

मुझे खुशी है कि फेमिना मिस इंडिया इंटरनेशनल का क्राउन जीतने के बाद सर्वप्रथम मैंने ही मध्यप्रदेश के एक प्रतिष्ठित अखबार के लिए नेहा का साक्षात्कार लिया था। तब से अब तक नेहा और हमारे बीच पत्रकार और सेलिब्रिटी से शुरू हुआ रिश्ता अब हमारी दोस्ती में तब्दील हो गया है। नेहा से मेरी कल और आज भी बातचीत हुई परंतु इस बार हमारी चर्चा मीडिया संबंधित विषय पर न होकर के दोस्ती का हक माँगने वाले दोस्तों के रूप में हुई।

आप सभी को यह जानकर खुशी होगी कि आप सभी की चहेती नेहा अब गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए फंड एकत्र कर रही है। 'आकांक्षा'और'टीच फॉर इंडिया' संस्था से जुड़कर नेहा अब गरीब बच्चों के चेहरों पर शिक्षा की मुस्कान ला रही है पर इंदौर और देवास में नेहा का यह अभियान तभी सफल हो सकता है। जब आप और हम नेहा के साथ मिलकर देश के बच्चों की शिक्षा के लिए आगे आए। मात्र 200 रुपए की स्टोरी बुक्स खरीदकर आप देश के एक बच्चे की शिक्षा में अभूतपूर्व योगदान देकर नेहा के इस कार्य को अच्छा प्रतिसाद दे सकते हैं। नेहा इस कार्य की शुरूआत करने के लिए जल्द ही अपने गृहनगर देवास आने वाली है।

सभी ब्लॉगर बंधुओं से नेहा हिंगे का अनुरोध है कि आप भी इस पुनीत कार्य में नेहा के सहयोगी बनें। यदि आप स्वयं या अपने मित्रों व रिश्तेदारों के साथ मिलकर धनराशि एकत्र कर नेहा का सहयोग कर सकते हैं तो कृपा करके मुझे अपना फीड बैक भेजें ताकि मैं आपके फीडबैक से नेहा को अवगत करा सकूँ।

गायत्री शर्मा

Tuesday, July 13, 2010

बरखा का श्रंगार

बरखा की बूँदों ने
किया श्रंगार।
सूरज ने लुटाया
मुझ पर अपना प्यार।

कल तक था मैं गुमनाम
जलता था तपिश में मैं।
बरखा रानी चुपके से आई
धीरे से कानों में फुसफुसाई।

बूँदे बोली मुझसे
क्यों है तू उदास?
चल मेरे साथ कर ले
मौज-मस्ती और उल्लास।

खुशबू अपनी तू लुटा
झुम-झुम के तू गा।
मस्त पवन के झोको संग
तू मंद-मंद मुस्का।

पवन लेकर चली पाती प्रेम की
बूँदों ने मधुर गान गाया।
बरखा के मौसम में फूल
खुलकर मुस्कुराया।

-गायत्री

(यह कविता मेरे व्यक्तिगत ब्लॉग aparajita.mywebdunia.com पर 26 मई 2008 को पोस्ट की गई थी।)

मेरी यह कविता आपको कैसी लगी, आपके विचारों से मुझे अवश्य अवगत कराएँ।

Sunday, July 11, 2010

हे ईश्वर! तू कहाँ है?

ढ़ूढँती हूँ तुझे पहाड़ों, कंदराओं में
कहते है तू बसता है मन के भावों में

पुष्प, गंध, धूप क्या करू तुझे अर्पित?
खुश है तू अंजुली भर जल में

तुझमें मुझमें दूरी है कितनी?
मीलों के फासले है या है समझ अधूरी

क्या तू सचमुच बसा है पाषाण प्रतिमाओं में?
या तू बसा है दिल की गहराईयों में

आखिर कब होगा तेरा मेरा साक्षात्कार?
मिलों मुझसे पूछने है तुझसे कई सवाल

अब मन के इस अंधकार को दूर भगाओं
हे ईश्वर जहाँ भी हो अब तो नजर आओ।

- गायत्री शर्मा

(22 नवंबर 2008 को मेरे द्वारा मेरे व्यक्तिगत ब्लॉग aparajita.mywebdunia.com पर मेरे द्वारा यह कविता पोस्ट की गई थी।)


मेरी यह कविता आपको कैसी लगी? आपके विचारों से मुझे अवश्य अवगत कराएँ।

कराह उठी मानवता


कराह उठी मानवता
मौत के इन दंरिदों से

बू आती है दगाबाजी की
पड़ोसी के इन हथकंडों से।

हर बार बढ़ाया दोस्ती का हाथ
प्यार नहीं लाशे बनकर आई उपहार
बस अब खामोश बैठों देश के सत्ताधारों
अब वक्त है करदो शासन जनता के हवाले।

जेहाद का घूँट जिसे पिलाया जाता
भाई को भाई का दुश्मन बताया जाता
वो क्या जाने प्यार की भाषा
प्यार निभाना जिसे न आता?

मेरा देश जहाँ है शांति और अमन
दुश्मन नहीं सबके दोस्त है हम
जरा आँखे खोलों ऐ दगाबाज नौजवानों
अपने भटके कदमों को जरा सम्हालों।

जानों तुम उन माओ का दर्द
जिसने खोया है अपना लाल
सेज सजाएँ बैठी थी दुल्हन
पूछे अब पिया का हाल।

उन अनाथों के सपने खो गए
माँ-बाप जिनके इन धमाको में खो गए
ममता लुटाते सगे-संबंधी सारे
माँ-बाप की लाशों से लिपटकर रोते ये बेचारे।

आतंक का तांडव मचाकर
क्यों माँगता है तू मौत की भीख?
ऐ दरिंदे जरा सोच उन लोगों के बारे में
जो हो गए अब लाशों में तब्दील।

कब्रगाह बने है आज वो स्थान
जहाँ बसते थें कभी इंसान
काँपती है रूहे अब वहाँ जाने से
आती है दुर्गंध अब पड़ोसियों के लिबाज़ों से।

- गायत्री शर्मा

(मुंबई आतंकी हमलों के बाद 3 दिसंबर 2008 को मेरे व्यक्तिगत ब्लॉग aparajita.mywebdunia.com पर मैंने यह कविता पोस्ट की थी।)

आपको कैसी यह कविता लगी, आपके विचारों से मुझे अवश्य अवगत कराएँ।

औरत का सच्चा रूप है माँ

बचपन में लोरियाँ सुनाती माँ
हर आहट पर जाग जाती माँ
आज गुनगुनाती है तकिये को लेकर
भिगोती है आँसू से उसे बेटा समझकर

स्कूल जाते समय प्यार से दुलारती माँ
बच्चे के आने की बाट जोहती माँ
अब रोती है चौखट से सर लगाकर
दुलारती है पड़ोस के बच्चे को करीब बुलाकर

कल तक चटखारे लेकर खाते थे दाल-भात को
और चुमते थें उस औरत के हाथ को
आज फिर प्यार से दाल-भात बनाती है माँ
बच्चे के इंतजार में रातभर टकटकी लगाती माँ

लाती है 'लाडी' बड़े प्यार से लाडले के लिए
अपनी धन-दौलत औलाद पर लुटाती माँ
आज तरसती है दाने-पानी को
यादों और सिसकियों में खोई रहती माँ

लुटाया बहुत कुछ लुट गया सबकुछ
फिर भी दुआएँ देती है माँ
प्यार का अथाह सागर है वो
औरत का सच्चा रूप है माँ
औरत का सच्चा रूप है माँ ....

- गायत्री शर्मा

(यह कविता मेरे व्यक्तिगत ब्लॉग aparajita.mywebdunia.com पर 11 मई 2009 को पोस्ट की गई थी।)

मेरी यह कविता आपको कैसी लगी, आपके विचारों से मुझे अवश्य अवगत कराएँ।