Sunday, April 3, 2011

क्रिकेट को 'हाँ' .... हॉकी को 'ना'


- गायत्री शर्मा

सड़कों पर कर्फ्यू सा सन्नाटा,घरों और मुख्य चौराहों पर रौनक ... यह नजारा था आज देश के हर शहर का। जहाँ टीवी वहाँ लोग,जैसे कि एक अनार और सौ बीमार। कुछ लोगों ने तो जनसेवा करने के लिए अपनी दुकानों के बाहर बड़ी सी टीवी लगाकर ट्रॉफिक जाम करने की भरपूर व्यवस्था कर दी थी। कुछ भी कहो लेकिन यह बात तो अच्छी हुई कि वर्ल्ड कप में जीत हासिल करने से आज हम ‍फिर से विश्व विजेता बन गए। आज फिर से ‍क्रिकेट के मैदान में तिरंगे की जय-जयकार हुई। भारत का लाडला क्रिकेट जीतकर आया तो ऐसा लगा जैसे पटाखों के रूप में तारे जमीन पर आकर धोनी के धुरंधरों को सलाम कर रहे हैं। सचमुच यह भारतीयों की क्रिकेट के प्रति अँधी दीवानगी का ही असर है कि वर्ल्ड कप के शुरू होते ही बाजार खामोश हो गया। यह सब देखकर मुझे तो ऐसा लगा जैसे किसी राजनेता का देवलोकगमन हो गया हो और राजकीय शोक के साथ शासकीय अवकाश घोषित कर दिया गया हो। आने वाले 10 सालों में कुछ हो न हो पर हमारे कैलेंडर में क्रिकेट हे का अवकाश जरूर घोषित कर दिया जाएगा।  

बढ गई टीवी से नजदीकियाँ :
हाल ही में वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान के मैच के दिन तो जैसे सड़कों पर कर्फ्यू सा लग गया था। जिसमें अधिकांश लोग घरों में दुबककर बैठे थे। ‍क्रिकेट के देवता कहे जाने वाले सचिन के इस आ‍खरी वर्ल्ड कप में लोग टीवी से ऐसे चिपके जितने कि वह कभी अपनी धर्मपत्नी या प्रेमिका से भी ना चिपके होंगे। विश्वकप क्रिकेट की वजह से जहाँ कुछ घरों में पति वक्त पर घर लौटते हुए मिले तो कही क्रिकेट विरोधी पार्टनर होने के कारण टीवी का गला दबाकर उसे मारने तक की भी नौबत आ गई। सच कहूँ तो वाह रे क्रिकेट!तूने तो कमाल कर दिया। वर्ल्ड कप जीतने के कारण कुछ लोग हरभजन,सचिन और धोनी के चेहरे देखकर खुशी के मारे रोने लगे तो वहीं कुछ लोग यह कहते हुए खुशी से उछल पड़े कि अब हमारी टीवी डेली सोप के लिए मुक्त हो गई।  

सम्मान को तरसता हॉकी :
वैसे क्रिकेट कोई बुरा खेल नहीं है। मैं भी कभी-कभार क्रिकेट देख लेती है। लेकिन मेरा आपसे यह सवाल है कि जब राष्ट्रीय खेल हॉकी का फाइनल मैच होता है तब क्या हम उसे ‍क्रिकेट जितने चाव से देखते हैं,क्या हमारे देश के मशहूर अभिनेता व राजनेता हॉकी मैच के दौरान स्टेडियम में खिलाडि़यों का उत्साहवर्धन करने जाते हैं ??? .... बिल्कुल नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि जो दिखता है वहीं बिकता है। मीडिया ने क्रिकेट को बार-बार दिखाया,सेलीब्रिटीज ने इसे सर पर चढ़ाया और राजनेताओं ने इसे गले लगाया .... तभी तो मेरा क्रिकेट हॉकी से महान कहलाया। 

मुझे तो दुख इस बात का है कि ये हमें क्या हो गया है। क्रिकेट के जीत के जश्न में तो हो-हल्ला करके हम पूरे मोहल्ले को जगा रहे हैं पर हॉकी के प्रति सरकार व मीडिया की बेरूखी पर हम खामोशी का ढोंग रचा रहे हैं। जो कि गलत है। मेरा दावा है कि यदि क्रिकेट जितना प्रमोशन हॉकी का किया जाएँ तो हॉकी भी इस देश में ‍क्रिकेट जितना पॉपुलर हो सकता है। ऐसा होने पर उन खिलाडि़यों को भी सेलीब्रिटिज सा सम्मान मिलेगा,जो अभावों व गुमनामी के अँधेरों में जीते हुए भी भारत के राष्ट्रीय खेल हॉकी में देश का मान बढ़ाए हुए है।

अंत में चलते-चलते मैं आसे यही कहूँगी कि हम भारतीय है। भारत के सम्मान की रक्षा करनी व हर खेल को समभाव से देखकर सभी खेलों में देश का मान बढ़ाना हमारा परम कर्तव्य है। जय हो ....      

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