Friday, July 11, 2014

कहाँ सो रहे है आप?

मेरे शब्दों को सूखा खा गया
भावों को सूरज निगल गया

माटी सूखे का मातम मना रही है
पेड़ों की हरियाली पर अब शुष्णता छा रही है

अब तो आँसू भी सूख-सूखकर रो रहे है
पानी बाबा आप कहाँ छुपकर सो रहे है?

- गायत्री   

2 comments:

Prabhat Kumar said...

बहुत बढ़िया!

गायत्री शर्मा said...

शुक्रिया प्रभात जी।