Tuesday, July 8, 2014

जिम्मेदारी से जिरह करती लापरवाही


-          गायत्री शर्मा ‍
बच्चों की जिज्ञासु प्रवृत्ति कई बार उनसे वह काम करवा देती है, जिसके परिणामों से वे पूरी तरह से अनभिज्ञ होते हैं। यहीं वजह है कि गड्ढ़े को देखने की उत्सुकतावश उसके नजदीक गया बच्चा कभी बोरवेल के गड्ढ़े में गिर जाता है तो कभी पतंग पकड़ने के लालच में छत की मुंडेर से गिर जाता है। कभी वहीं अल्पायु बच्चा माता-पिता के अतिशय प्यार के चलते कार का स्टेयरिंग थाम दुर्घटनाओं को अंजाम देता है तो कभी अवयस्कता की उम्र में बलात्कार जैसे संगीन अपराध का दोषी पाया जाता है। याद रखिएँ बच्चे की सुरक्षा व सही परवरिश हर माँ-बाप की पहली जिम्मेदारी है, जिसमें हुई चूक से घटित हुए अपराधों के प्रथम दोषी माँ-बाप ही है। यह तो हुई अपरिपक्व मानसिकता व जिज्ञासा वश बच्चों से हुई गलतियों की बात लेकिन जब माँ-बाप की गलती व लापरवाही किसी बच्चे की मौत का सबब बने तो वह गलती किसी भी कीमत पर नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकती है। भोपाल के न्यू मार्केट स्थित कपड़ा व्यवसायी दीपक जैन के ढ़ाई वर्षीय पुत्र अतिशय जैन की कार में दम घुटने से हुई मौत माँ-बाप की घोर लापरवाही का ताजा तरीन उदाहरण है।
कहते हैं रिश्तों में प्रमोशन जिम्मेदारियों के बढ़ने का संकेत होता है। संतान को जन्म देने के साथ ही माँ-बाप की जिम्मेदारियों में भी इज़ाफा होने लगता है। बच्चों के बड़े होने तक उनकी हर छोटी-बड़ी फरमाइशें पूरी करने के बहाने माँ-बाप भी अपने बचपन को जी लेते हैं। नन्हें की किलकारीयों पर ठहाके मारने वाले, उसकी हर तकलीफ पर आह भरने वाले, घोड़ा बन नन्हें को पीठ पर बैठाने वाले, वह माँ-बाप ही होते हैं, जो अपने नन्हों की जिद पर कभी घोड़ा बन जाते हैं ‍तो कभी सांता क्लॉज बन बच्चों को क्षणिक खुशियाँ उपहार में दे जाते हैं। हर दुआ में ईश्वर से अपनी जिंदगी के बदले संतान की खुशियों की चाह करने वाले माँ-बाप अपने ढ़ाई साल के बच्चे के प्रति कैसे इतने लापरवाह हो सकते हैं कि वह उसे कार में लॉक कर घंटों तक अकेला छोड़ जाएँ?

लापरवाही की भी हद होती हैं। जब लापरवाही अपनी हदें लाँघ जाती है तब वह षडयंत्र या साजिश कहलाती है। अतिशय जैन की कार में दम घुटने से हुई मौत जहाँ एक ओर लापरवाही से हुई चूक लगती है तो वहीं दूसरी ओर जानबूझकर की गई गलती की ओर भी ईशारा करती है। बच्चे को कार में सोता छोड़कर दुकान के काम में लग जाने को एक बारगी हम दीपक जैन व उनके पिता कमल जैन की चूक भी मान लें पर क्या बच्चे के प्रति जवाबदेही में सबसे अधिक सजग रहने वाली घर की महिलाएँ भी इतनी लापरवाह हो सकती है कि वे भी अतिशय की सुध लेना भूल गई? अतिशय के साथ कार में बैठी उसकी दादी व माँ को ढ़ाई घंटे तक बच्चे की याद कैसे नहीं आई? आपकी जानकारी के लिए न्यू मार्केट भोपाल के खचाखच भीड़ से भरे बाजारों में प्रमुख है। जहाँ दिन भर लोगों की आवाजाही लगी रहती है। ऐसे में दोपहर के वक्त क्या किसी की भी नजर सड़क पर खड़ी कार में दम घुटने से बिलखते बच्चे पर नहीं पड़ी? यह बात आसानी से किसी के गले नहीं उतरती। बच्चे की मौत के बाद अस्पताल से पोस्टमार्टम कराएँ बगैर उसे ताबड़तोड़ दफना देना इस घटना के पीछे साजिश के कई सवाल खड़े करता है। जिनके जवाब के लिए फिलहाल हमें पुलिस की जाँच रिर्पोट का ही इंतजार करना पड़ेगा। नन्हें बच्चे की देखरेख में इतनी बड़ी चूक कोई सामान्य बात नहीं है। यदि चूक जानबूझकर की गई है तो इस चूक के दोषियों को जरूर सजा मिलनी चाहिएँ फिर चाहें वह बच्चे माँ-बाप ही क्यों न हो। जिससे कई अन्य गैरजिम्मेदार पालको को भी सबक मिले। याद रखिएँ बच्चे की सही परवरिश करना प्रत्येक माँ-बाप का सबसे बड़ा दायित्व है। यह दायित्व तब और बढ़ जाता है, जब बच्चा इतना छोटा हो कि वह अपनी सुरक्षा स्वयं न कर सके। कहते हैं बच्चों के संस्कारों की पाठशाला भी उसके माँ-बाप होते है और उसकी बुरी आद‍तों की पाठशाला भी माँ-बाप ही होते हैं खासकर तब जब बच्चा 5 साल से कम उम्र का हो। माता-पिता को चाहिएँ कि वह अपने बच्चों की प‍रवरिश व सुरक्षा पर पूरा ध्यान दें। देश के हर बच्चे को उसकी जिंदगी जीने का व खुश रहने का पूरा-पूरा अधिकार है। बच्चों से उनका बचपन न छीनें व उन्हें अच्छी परवरिश देकर एक जिम्मेदार माँ-बाप होने का परिचय दें।   
नोट : मेरे इस लेख का प्रकाशन राष्ट्रीय दैनिक 'कैनविज टाइम्स' के 8 जुलाई 2014 के अंक में संपादकीय पृष्ठ पर व उज्जैन से प्रकाशित सांध्य दैनिक 'अक्षरवार्ता' के 6 जुलाई 2014 के अंक में हुआ है। कृपया मेरे ब्लॉग की किसी भी सामग्री का प्रयोग करने पर साभार अवश्य दें व इस संबंध में मुझे अवश्य अवगत कराएँ। 


5 comments:

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज गुरुवार १० जुलाई २०१४ की बुलेटिन -- राम-रहीम के आगे जहाँ और भी हैं – ब्लॉग बुलेटिन -- में आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार!

गायत्री शर्मा said...

सेंगर जी, ब्लॉग बुलेटिन में मेरे लेख को स्थान देने के लिए आपका अतिशय आभार।

Anonymous said...

I don't even know how I ended up here, but I thought this post was great.

I do not know who you are but certainly you are going to a famous blogger if you aren't already ;) Cheers!


My web-site Upper Back Braces

गायत्री शर्मा said...

Thanks for your comments.

गायत्री शर्मा said...

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