स्वच्छ शहर का अस्वच्छ चेहरा (जल ही मौत है....)
- डॉ. गायत्री शर्मा यह कथन इंदौर के भगीरथपुरा में बीते दिनों 'जल ही मौत है' का पर्याय बन गया है। जीवन के लिए अमृततुल्य पेयजल ही विष बन एक के बाद एक इंदौर में 15 लोगों की मौत का कारण बन गया। दूषित जल से मौत का यह सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है। हर बीमारी को काटने का रामबाण इलाज कहा जाने वाला पानी ही प्रदूषित होकर बीमारी के रूप में मौत का संदेशा ले आएगा, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। एक-एक करके 15 मौते, एक ही कॉलोनी भगीरथपुरा में जैसे शमशान में पसरे सन्नाटे व आँसुओं की गाथा सुनाती है। जिन घरों में कल तक बच्चों का उन्मुक्त हास्य, महिलाओं की चूड़ियों की खनक और पिता दादा की वार्तालाप की रौनक होती थी, उन घरों में आज अर्थियां सजाई जा रही है और परिजनों का अपनों से असामयिक बिछड़ने का करुण रुदन सुनाई देता है। यदि आज इन गरीबों की जगह वीवीआईपी के परिजन होते तो इक्का दुक्का की जगह बड़े बड़े पदों पर आसीन नेता व जनप्रतिनिधियों को अपने पद का मोह त्याग सत्ता सुख से वनवास पर जाना होता लेकिन यहाँ भी हमने जुगाड़ कर कुछ जिम्मेदारों के ताबदले कर दिए, बाकी सब जिम्मेदार एक बार अस्पताल जाकर अब जनता क...