Tuesday, July 20, 2010

नेहा हिंगे से मेरी चर्चा के कुछ अंश

मध्यप्रदेश के देवास शहर से अपने सफर की शुरूआत करने वाली नेहा ने जो भी सपना देखा। उसे पूरा कर दिखाया। बचपन से ही 'मिस इंडिया' बनने का ख्वाब देखने वाली नेहा आज बचपन में देखे अपने सपने को जी रही है। नेहा के 'फेमिना मिस इंडिया इंटरनेशनल 2010'का क्राउन जीतने के दो दिन बाद जब मेरी नेहा से फोन पर बातचीत हुई। तब उनके जीत की खुशी उनके शब्दों में घुली मिठास से झलक रही थी।

मृदुभाषी नेहा से मेरी उस दिन से लेकर अब तक कई बार टेलीफोन पर बातचीत हो चुकी है पर मुझे इस बात की बेहद प्रसन्नता है कि उनसे हुई पहली चर्चा में मुझे इस बात का तनिक भ‍ी आभास नहीं हुआ कि यह वहीं लड़की है, ‍‍‍जिसने दो ‍दिन पहले 'फेमिना मिस इंडिया इंटरनेशनल' का खिताब जीता है। स्वयं की जीत पर न कोई गुरूर और न ही बातचीत में किसी तरह का अक्खड़पड़ ... कुछ ऐसी ही है नेहा। जिसका बस एक ही शौक है और वह है मोबाइल को घंटों कान से लगाकर बतियाने का।

खुशमिजाज और अलमस्त नेहा की आवाज फोन पर पूर्णत: आत्मविश्वास से लबरेज थी। बातों ही बातों में नेहा ने मुझे बताया कि बचपन में वो बार-बार आईने में खुद को देखकर तरह-तरह के पोज़ बनाती थी और खुश जाती थी। अपने बचपन में हर लड़की की तरह नेहा भी यही सोचती थी कि मैं भी बड़ी होकर 'मिस इंडिया' बनूँ। नन्ही नेहा का यह सपना आज हकीकत बन गया है और जब कोई सपना हकीकत बनता है तो उसे जीने का मजा ही कुछ और होता है।

पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर नेहा जितना अपने माता-पिता और बहन से प्यार करती है। उतना ही प्यार वह अपनी बुआ से भी करती है। तभी तो फोन पर बात करते हुए बार-बार नेहा ने मुझसे कहा कि प्लीज मैडम, आप भले ही मेरे इंटरव्यू में मेरे माता-पिता का नाम मत देना पर देवास में रहने वाली मेरी बुआ का नाम मेरे नाम के साथ जरूर देना क्योंकि मैं उनसे बहुत प्यार करती हूँ। इसी के साथ ‍ही नेहा ने मुझे उनके स्कूली दिनों की यह बात भी बताई कि जब वह देवास में स्कूल जाती थी। तब उनकी बुआ हर रोज लंच टाइम में अपनी प्यारी सी भतीजी को चॉकलेट खिलाती थी। नेहा इसे अपनी बुआ की खिलाई चॉकलेट का ही असर मानती है कि आज वह सबसे बहुत मीठा बोलती है।

कामयाबी की इस बुलंदी को छुने के बाद भी नेहा का अपनी जमीन से जुड़ाव है। आज भी वह देवास में बिताए अपने बचपन के दिनों को याद करती है। देवास का अपना घर, बचपन के खेल, देवास की माहेश्वरी की मिठाईयाँ, बचपन के वो साथी सभी आज भी मीठी याद बनकर नेहा के यादों के पिटारे में बंद है, जिसे खोलते ही वह अपने बचपन में खो जाती है। नेहा की दिली ख्वाहिश है कि बुढापे में भी यदि ईश्वर ने चाहा तो वह देवास में आकर ही अपने जीवन का बचा वक्त बिताना चाहेगी।
- गायत्री शर्मा

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