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तू आता है और चला जाता है ...

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तू आता है और चला जाता है  दबे पाँव उनींदी आँखों का सपना बन  सपनों को हकीकत का धरातल दिखाता है  तू आता है और चला जाता है जब सरसराते हैं गालों पर बाल  जब सूरज को देख अलसाती है आँखे  तब तू मिलन के मीठे सपने सजाता है  तू आता है और चला जाता है  आती है फिजाओं में कस्तूरी की महक  मन ही मन कुछ हुआ जाता है  खुद को आईने में देखूँ तो आईना शरमाता है  तू आता है और चला जाता है   कोरे पन्नों पर उकेरती हूँ कल्पनाएँ  तब तू दिलो दिमाग पर छा जाता है  अल्फाज दिल में उठते हैं मेरा मन कवि बन जाता है  तू आता है और चला जाता है ..... - गायत्री 

डॉ. सैयदना बुरहानुद्दीन साहब हुए जन्नतनशीं

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जन्नतनशीं हुए अपने आका मौला की पार्थिव देह की एक झलक पाने मात्र को बोहराजनों में उत्साह देखते ही बनता था, दुनियाभर से डॉ. सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन साहब के अनुयायी उन्हें अंतिम विदाई देने मुबंई पहुँचे। बोहरा समाज के धर्मगुरू के इंतकाल की खबर वाकई में एक दुखद खबर थी, जिसे सुनने मात्र से ही बोहरा समाज के हर परिवार में शोक की लहर छा गई। दुनियाभर के बोहरा समाज के लोग ताबड़तोड़ सैयदना साहब की आखिरी झलक पाने को मुबंई पहुँच गए। लेकिन इसे उनके अनुयायियों का अति उत्साह कहें या आतुरता भरी अति श्रृद्धा कहें, जिसके बहाव ने मुबंई में भगदड़ का ऐसा तांडव रचा कि अपने आका-मौला के निधन पर शोक व्यक्त करने गए कई बोहराबंधु स्वयं मौत की नींद सो गए। करीब 17 लोग इस भगदड़ में मारे गए और लगभग 60 लोग घायल हो गए। सच में यह घटना बेहद ही दुखद व चिंताजनक है। क्या भावनाओं का इतना अतिरेक और इस तरह से भीड़ के जनसैलाब के रूप में उसकी अभिव्यक्ति उचित है? क्या भीड़ का बेकाबू होना अति भीड़ व सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने की वजह थी?       सामाजिक एकजुटता व अपने धर्मगुरू के प्रति बोहरा समाज के लोगों ...

सुनंदा पुष्कर की मौत या आत्महत्या?

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केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध स्थितियों में मौत। हाल ही में सोशल मीडिया में दोनों पति-पत्नी के दापंत्य संबंधों के बीच आई तकरार सार्वजनिक रूप से तब सामने आई थी। जब शशि थरूर के पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के साथ प्रेम संबंधों को लेकर सुनंदा पुष्कर का मेहर को किया गया तीखा ट्विट व गुस्से में मेहर तरार को आईएसआई एजेंट तक कहने का ट्विट सार्वजनिक रूप से सामने आया था। मीडिया पर इस मुद्दे के उठने के बाद इस हाईप्रोफाइल जोड़े ने मीडिया के सवालों से बचने के लिए और अपने दापंत्य रिश्तों को संभालने के लिए यह ट्विट किया था कि हम दोनों पति-पत्नी के बीच सब कुछ ठीक चल रहा है। लेकिन इस ट्विट के आने के 24 घंटों के भीतर ही सुनंदा की दिल्ली के लीला होटल के कमरा नंबर 345 में मिली संदिग्ध लाश सुनंदा की मौत के कारणों को संदिग्धता के घेरों में डालती है। जहाँ सुनंदा शशि की तीसरी पत्नी थी, वहीं शशि भी सुनंदा के तीसरे पति थे। यदि हम कुछ साल पीछे जाएँ तो आईपीएल मैच में केरल के शशि और काश्मीर की सुनंदा के प्रेम संबंधों की खबर पहली बार सामने आई थी। उसके बाद...

कैसी हठ पर अड़े हो दोस्त?

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इस बार तुम कैसी हठ पर अड़े हो दोस्त? ईगो में तो तुम मुझसे भी बड़े हो दोस्त। मन ही रोते हो बीते दिनों को याद कर भीड़ देख क्यों मुस्कुरा पड़े हो दोस्त? सबकुछ है साफ-साफ, सुलझा-सुलझा फिर किस धुँध को साफ करने में तुम लगे हो दोस्त? झूठ ही सही 'हार' मान लो हमारे लिए क्यों 'जीत' के इंतजार में ही तुम खड़े हो दोस्त? क्या त्योहारों पर औपचारिकताएँ ही होगी पूरी क्या अब कभी पहले सी सहजता से तुम हमसे मिलोगे दोस्त? - गायत्री 

चोरी-चोरी कोई आएँ, चुपके-चुपके ...

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‘उमराव जान’ का नवाब सुल्तान, ‘साथ-साथ’ का अविनाश और ‘चश्मेबद्दूर’ का सिद्धार्थ ... आप सभी को याद होगा। इन किरदारों पर गौर फरमाने पर आपके जेहन में एक मुस्कुराता चेहरा आएगा। कशीदाकारी से सजी शेरवानी और नवाबी टोपी के साथ ही गोल-मटोल गालो पर आड़ करते लंबे बालों का उनका वो लाजवाब लुक भूलाएँ नहीं भूलता। अब कुछ याद आया आपको? जी हाँ, मैं बात कर रही हूँ गुजराती बटेका (आलू) से दिखने वाले गोल-मोल फारूख शेख की, जो कि फिल्म इंडस्ट्री में एक जाना-पहचाना नाम है। फारूख का नाम आते ही हम सबकी ज़ुबा पर दिप्ती नवल का नाम जरूर आता है आखिर हो भी क्यों न, 7 फिल्मों में कमाल-धमाल करने वाली दिप्ती और फारूख की जोड़ी अपने समय की हिट जोडि़यों में शुमार थी। आज भी ताज़ा-तरीन लगने वाले ‘ये तेरा घर, ये मेरा घर ...’, ‘चोरी-चोरी कोई आए, चुपके, चुपके ... ’, ‘नूरी,नूरी ...’ जैसे कई सदाबहार नग़में फारूख पर फिल्माएँ गए थे। बड़े पर्दे के कलाकार फारूख की लाजवाब शक्सियत के जादू से छोटा पर्दा भी अछूता नहीं था। फिल्मों में दिप्ती नवल के साथ प्रेम की मीठी नोंक-झोक कर दर्शकों को गुदगुदाने वाले फारूख छोटे पर्दे पर ‘जीना इसी का...

‍न फनकार तुझसा तेरे बाद आया, मोहम्मद रफी तू बहुत याद आया ...

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संगीत सम्राट मोहम्मद रफी की तारीफ में कुछ कहना सूरज को रोशनी दिखाने के समान है। गायन के क्षेत्र में रफी का जो कद है, उसे छू पाना भी आज के दौर के किसी गायक के बस की बात नहीं है। रफी अपने गीतों में जो सालों पहले गुनगुना कर कह गए, वह आज भी ताज़ा तरीन सा लगता है। दिल की गहराईयों से सुने तो रफी के गीतों में पिरोये अल्फाज़ आपकी और हमारी जिंदगी की ही कहानी है, जिसमें प्रेम की मिठास है, मिलन की पुरवाई है, दर्द की कसक है, और प्रेम में ठोकर खाने पर ज़माने से मिली रूसवाई है। प्रेम के युगल गीतों के साथ ही दर्द भरे नगमों में भी दूर-दूर तक रफी का कोई सानी नहीं है। आज भी तन्हाई में रफी के दर्द भरे नग़में विरह की कसक बन हमारी आँखों से आँसू बन छलकते है और हमराज बन हमारे दिल के दर्द को बँया करते हैं। क्या बात हो, जब रात हो, तन्हाई हो और रफी की रूहानी आवाज़ हो। तब रात गुनगुनाते हुए कब बीत जाएगी, आपको पता ही नहीं चलेगा। 24 दिसम्बर 1924 को एक आम इंसान के रूप में जन्म लेने वाला यह फरिश्ता सुरों के मामले में खुदा की विशेष नैमतों से नवाज़ा गया था। रफी के इस जन्मजात हूनर को तराशना व उनके गीतों को सुरो...

अपीयरेंस और अदाकारी में लाजवाब टुन टुन

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नौशाद साहब के दरवाजे पर गायिका बनने की गुजारिश के साथ अचानक से दस्तक देने वाली 13 वर्षीय उमा के लिए संगीत की दुनिया के इस अज़ीज फ़नकार के रहमो-करम की इनायत मिलाना खुदा की किसी नैमत से कम नहीं था। बड़ी उम्मीदों के साथ कुछ कर दिखाने का ज़ज्बा लिए उत्तर प्रदेश से मुबंई आई उमा देवी अपनी जिद की बड़ी पक्की थी। तभी तो पहली ही मुलाकात में इस भारी-भरकम जिद्दी लड़की ने नौशाद साहब को ही कह दिया कि यदि उन्होंने उसे गाने का मौका नहीं दिया तो वह समन्दर में कूदकर अपनी जान दे देगी। भविष्य में उसी जिद ने उन्हें बॉलीवुड की चोटी की गायिका और हास्य अभिनेत्री बना दिया। जी हाँ, मैं बात कर रही हूँ लड्डू से गोल-मटोल चेहरे व हाथी से भारी-भरकम शरीर वाली अभिनेत्री उमा देवी उर्फ टुन टुन की। ‘अफसाना लिख रही हूँ दिले बेकरार का, आँखों में रंग भरके तेरे इंतजार का ...’ फिल्म ‘दर्द’ के इस सदाबहार गीत को अपनी सुरीली आवाज दी थी उमा देवी ने। इसे हम वक्त का फेर ही कहें कि आज भी यह गीत तो हमें यदा-कदा सुनाई दे जाता है लेकिन सीता देवी का जिक्र हमें कभी सुनाई नहीं देता। आखिर क्यों यह बेहतरीन गायिका गायकी छोड़ सदा ...

लाजवाब हुस्न की मलिका - मीना कुमारी

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तुम क्या करोगे सुनकर मुझसे मेरी कहानी, बेलुत्फ जिंदगी के किस्से है फीके-फीके महज़बीन बानो यानि कि मीना कुमारी का यह श़ेर उनकी जिंदगी की विरानियों का दर्द बँया करता है। फिल्म इंडस्ट्री में ‘ट्रेजेडी क्वीन’ के रूप में अपनी पहचान बनाने वाली मीना कुमारी बेहतरीन अदाकारा के साथ एक उम्दा उर्दू शायरा भी थी। आईने सा उजला लंबा चेहरा और गालों पर अठखेलियाँ करते घुँघराले बाल, शाम के ज़ाम के नशे सी नशीली आँखे और बड़े होठों से आँचल दबाने का वो कातिलाना अंदाज .... कोई इस रूप-लावण्य को कैसे भूल सकता है जनाब? लाजवाब माँसल सौंदर्य से परिपूर्ण ‘पाकीज़ा’ की मीना की संगमरमरी काया ने अपने हुस्न से जलवों से फिल्म के रूपहले पर्दे पर धूम मचा दी थी। जी हाँ, मैं बात कर रही हूँ 50 व 60 के दशक की उस लाजवाब नायिका की, जिसने ‘साहिब बीबी और गुलाम’ में छोटी बहू के किरदार को अपने उम्दा अभिनय से अमरता प्रदान की थी। मीना कुमारी को फिल्म परिणीता में ललिता, काजल में माधवी, बेजू बावरा में गौरी और साहिब बीवी और गुलाम में छोटी बहू के किरदार के लिए बेहतरीन अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी नवाजा गया।  ...

चाँद मेरा दिल, चाँदनी हो तुम ...

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चाँद, आसमान में चमकता वो श्वेज ज्योतिपुंज है, जिसके रूप-सौंदर्य के आगे सब कुछ फीका है। कहने को तो नासा के वैज्ञानिक चाँद की उबड़-खाबड़ सतह पर गड्ढ़ों का दावा करते है परंतु इसी गड्ढ़ों वाले चाँद पर प्रेमियों के प्रेम की गाड़ी बेरोकटोक सरपट दौड़ती है। चाँद में कितने भी ऐब हो परंतु प्रेमियों के लिए वह अपने खूबसूरत और वफादार साथी की तरह बेऐब है क्योंकि जहाँ प्यार होता है, वहाँ पसंद होती है और जहाँ प्यार और पसंद दोनों होती है वहाँ प्रेम की प्रगाढ़ता के आगे हर ऐब गौण हो जाता है। जिस चाँद से प्रेमी हर रोज घंटों बतियाते हैं, उस पर जब घर बसाने की बात हो तो प्रेमी भला कैसे पीछे रह सकते हैं? नासा की चाँद पर घर बसाने की संभावनाओं ने तो प्रेमियों को असल में चाँद पर जाने की नई उम्मीदें दी है। जब ऐसा होगा तो वाकई में प्रेमी का दिल गा उठेगा ... ‘चलो दिलदार चलो, चाँद के पार चलो’।यह आसमान में चमकने वाला चाँद ही है, जिसकी सुनहरी चाँदनी में नहाकर प्रेमी प्रेम की अगाध गहराईयों में खो जाते हैं। घंटों तक प्रेमिका का हाथ थामे अपलक चाँद को निहारना, प्रेमिका के लिए चाँद तोड़कर ज़मी पर लाना, चाँद की...

60 के दशक का चॉकलेटी ब्वॉय : जॉय

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वो 60 का दशक था, जब मासूम चेहरे पर मंद-मंद मोहक मुस्कुराहट और दिल में प्यार की कशिश लिए फिल्मों के रूपहले पर्दे एक चॉकलेटी ब्वॉय की धीमी दस्तक हुई। उनके चेहरे की मासूमियत, गोरे चिकटे चेहरे पर हिरण सी बड़ी-बड़ी आँखे, लाजवाब केश सज्जा और कातिल मुस्कुराहट ने जैसे दर्शकों को उनके आकर्षण जाल में मजबूती से बाँध दिया। जॉय को देख बस घंटों तक उन्हें निहारने को ही मन करता था। उनकी प्रशंसक लड़कियाँ तो टेलविजन पर अपने इस हीरों को अपलक निहारती ही रहती थी। वाकई में एक अजीब सा जादू था मासूमियत से भरपूर उस चेहरे में, जिसे देख लड़कियों का मोहित होना लाजिमी ही था। जॉय की बेहतरीन अदाकारी के कारण उनकी फिल्मों से ..., तो कई बार जॉय की खूबसूरती के कारण उनसे और परोक्ष रूप से उनकी फिल्मों से दर्शकों को प्यार होने लगा। साधना, वहिदा रहमान, वैजंती माला जैसी मशहूर कमसीन अभिनेत्रियों के साथ फिल्मों प्रेम के गीत गाने वाले इस रोमांटिक हीरों के खाते में लव इन टोकियों, शार्गिद, जिद्दी, फिर वहीं दिल लाया हूँ, आओ प्यार करें, ईशारा और एक मुसाफिर एक हसीना जैसी कई फिल्में थी।     बॉलीवुड का छैला कहलाने ...