मालवांचल में 'चरकली' 'आँगन की चिड़ियाँ' कही जाने वाली नन्हीं गोरैया को कहा जाता है कहते हैं, जब बेटियाँ मायके आती हैं तो उनकी रौनक व मुस्कराहट से पिता के घर का आँगन भी चहचहा उठता हैंI यहीं कारण हैं कि बेटियों को भी 'चरकली' कहा जाता हैं , जो मायके और ससुराल के आँगन की शोभा होती हैंI अभिव्यक्ति के विविध माध्यम होते हैं , उनमें से एक माध्यम ब्लॉग भी हैं 'चरकली' ब्लॉग मेरे व्यक्तिगत विचारों, कविताओं, यात्रा वृत्तांतों और यादगार स्मृतियों का दस्तावेजीकरण हैं आप सभी का मेरे इस ब्लॉग पर स्वागत हैंI
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