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नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी का मंदिर

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- डाॅ. गायत्री शर्मा भक्तों की संकटहरणी और ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं का काल बनकर उन्हें मन, वचन और वाणी से वश में करने वाली पीताम्बरा माँ बगलामुखी के दर्शन कर मन प्रसन्न हो गया। दिव्य तेज वाला माँ पीताम्बरा का विग्रह दर्शन मात्र से ही भक्तों के कष्टों को हर लेता है।       यह माँ का चमत्कार ही है कि घर में अग्नि के संपर्क में आते ही हमारे नाक गला, मुँह और आंखों को जलाने वाली साबुत लाल मिर्च भी नलखेड़ा के इस पावन स्थल पर आकर अपनी प्रकृति को भूल जाती है व किसी को हानि पंहुचाए बगैर हवन कुंड में धू-धू कर राख बन शत्रुओं का काल बन जाती है। यहीं कारण है कि माँ पीताम्बरा के इस धाम में मनोकामनापूर्ति हेतु मिर्च का हवन किया जाता है।       देश के सुदूर कोनों से भक्तजन अपने कष्टों का निवारण पाने व शत्रु के भय व वार से अपनी रक्षा की चाह में मां बगलामुखी की शरण में आते हैं। यह मां की अपनी संतानों के प्रति ममता ही है कि लोग यहां खाली झोली लेकर आते हैं और मां की कृपा से प्रसन्न मन से अपनी झोलियां खुशियों से भरकर इस दरबार से वापस जाते है। पीले रंग के सुंदर मंदिर मे...

स्वच्छ शहर का अस्वच्छ चेहरा (जल ही मौत है....)

- डॉ. गायत्री शर्मा  यह कथन इंदौर के भगीरथपुरा में बीते दिनों 'जल ही मौत है' का पर्याय बन गया है। जीवन के लिए अमृततुल्य पेयजल ही विष बन एक के बाद एक इंदौर में 15 लोगों की मौत का कारण बन गया। दूषित जल से मौत का यह सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है।  हर बीमारी को काटने का रामबाण इलाज कहा जाने वाला पानी ही प्रदूषित होकर बीमारी के रूप में मौत का संदेशा ले आएगा, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। एक-एक करके 15 मौते, एक ही कॉलोनी भगीरथपुरा में जैसे शमशान में पसरे सन्नाटे व आँसुओं की गाथा सुनाती है। जिन घरों में कल तक बच्चों का उन्मुक्त हास्य, महिलाओं की चूड़ियों की खनक और पिता दादा की वार्तालाप की रौनक होती थी, उन घरों में आज अर्थियां सजाई जा रही है और परिजनों का अपनों से असामयिक बिछड़ने का करुण रुदन सुनाई देता है। यदि आज इन गरीबों की जगह वीवीआईपी के परिजन होते तो इक्का दुक्का की जगह बड़े बड़े पदों पर आसीन नेता व जनप्रतिनिधियों को अपने पद का मोह त्याग सत्ता सुख से वनवास पर जाना होता लेकिन यहाँ भी हमने जुगाड़ कर कुछ जिम्मेदारों के ताबदले कर दिए, बाकी सब जिम्मेदार एक बार अस्पताल जाकर अब जनता क...

जगन्नाथपुरी चमत्कारों की धरा

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- डॉ. गायत्री शर्मा              संपूर्ण चराचर जगत् के नाथ, प्रजापालक, भक्तवत्सल श्री जगन्नाथजी के परम धाम की यात्रा करना अति पुण्यदायी माना गया है। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानती हूं, जो मुझे वर्ष 2025 में दो बार इस यात्रा का सौभाग्य प्राप्त हुआ। जब मन में प्रभु दर्शन की इच्छा प्रबल हो, तो सारे किंतु, परंतु, लेकिन..... धरे के धरे रह जाते हैं और भक्त चुंबकीय आकर्षण शक्ति से भी अधिक तेजी से जगन्नाथपुरी की ओर खींचा चला जाता है। मेरी कल्पनाओं से परे यह यात्रा अचानक प्लान हुई और दोनों ही बार कई व्यवधानों के बावजूद मेरी यह यात्रा अविस्मरणीय अनुभवों, रोमांच व चमत्कारों की साक्षी बनी। अपनी यात्रा के अनुभवों व जनश्रुतियों के आधार पर मैंने जगन्नाथपुरी धाम की यात्रा के इच्छुक भक्तों के लिए कुछ जानकारी अपने इस लेख में प्रदान करने का प्रयास किया है।    नीलांचल निवासाय नित्याय परमात्मने। बलभद्र सुभद्राभ्याम् जगन्नाथाय ते नमः॥      देवता भी जहां जन्म लेने व प्रभु दर्शन पाने को तरसते है, ऐसे नीलांचल के वासी श्री बलभद्रजी, देवी सुभद्...

इंदौर की सड़क पर काल का तांडव

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- डॉ. गायत्री शर्मा  जिंदगीभर साथ की बजाय अब सुबह के बाद शाम ढ़लने तक के ही साथ की ही बात होती है, जिसकी वजह है दुर्घटनाएं। देश में दुर्घटनाओं की रफ्तार इन दिनों हमारी धड़कनों की गति से भी अधिक ज्यादा हो रही है। हर क्षण हम सभी युद्ध, अतिवृष्टि, भूकंप, दुर्घटनाओं आदि अप्रत्याशित के भय से डरे सहमें खामोश बैठे है। हर कदम, हर उड़ान पर संशय और भय व्याप्त है क्योंकि क्या पता कब, किस रूप में कभी मौत हमारा भी अकल्पनीय रूप से आलिंगन कर ले?  तेरी कमीज़ मेरी कमीज़ से सफेद क्यों, तेरी साड़ी मेरी साड़ी से सुंदर क्यों.......इन सभी से आगे निकलते हुए कलयुगी मनुष्य अब तेरी गाड़ी मेरी गाड़ी से तेज रफ्तार में क्यों पर भी ईष्या करने लगा है और दूसरे को हराने की होड़ में मौत के कुएं में हर दिन कभी न खत्म होने वाली प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बनता जा रहा है। रफ्तार का ऐसा तांडव, जो काल बनकर कई परिवारों के रोशन चिरागों को सदा के लिए बुझा गया, इंदौर में भी देखने को मिला। इस घटना में भी सड़क के घर्षण को तेज गति से पीछे छोड़कर आगे बढ़ते ट्रक के ब्रेक, लोगों की चीख, चित्कार और रहम की पुकार क्षणभर में ही खामोश हो गई और लाश...

मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर करना

'मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर करना, हिंदी है हम वतन है, हिंदोस्ता हमारा' यह गीत केवल गुनगुनाने मात्र का नहीं है। इस गीत के बोल भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब को दर्शाते है। लेकिन आतंक है कि भारत की एकता को खंडित करने के नापाक़ इरादों से अपने कदम बढ़ाते ही जा रहा है।         आतंक का घिनौना रूप, जो कल पहलगाम के पास आतंकी हमले के रूप में देखने को मिला, कहीं ना कहीं यह आतंकियों की उन घटिया और निम्न स्तर की सोच को दर्शाता है, जो जाति व धर्म के नाम पर राम और रहीम को दोस्त से दुश्मन बनाना चाह रहे है। ये वो लोग है, जिन्हें विकास के पथ पर बढ़ते भारत को देख चिढ़ हो रही है। जिस तरह से खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचती है, वैसे ही देश के भीतर पलने वाले आतंकी रूपी जोक आतंक को प्रायोजित कर ख़ुश हो रहे है।          याद रखिए भारत, भूमि का टुकड़ा मात्र नहीं है, यह वो जाग्रत माँ है, जो सिंहनी के समान झपटकर अपने बच्चे की तरफ आँख उठाने वाले के प्राण हरना जानती है। आप भी इस माँ के चंडी रूप धरने से पहले अपनी हरकतों से बाज आ जाओ और वतन के गद्दार से वफादार बन जाओ। वतन के गद्दार...

मानवता के मुँह पर तमाचा है बलात्कार

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  - डॉ. गायत्री शर्मा हम क्या थे और किस ओर जा रहे हैं, इसका विचार किए बगैर ही आज का मानव दैहिक और भौतिक सुख की अति पराकाष्ठा  के उस चरम शिखर पर पहुंच गया है, जहाँ से दोबारा लौटकर उसका पशु से इंसान बनना अब नामुमकिन सा लगता है। कहते हैं इंसान के शरीर से ज्यादा उसकी आत्मा का शुद्ध होना जरुरी हैं पर 'मुँह में राम, बगल में छुरी' के इस बनावटी युग में इंसान के लिए सारा आकर्षण व दैहिक भूख का केंद्र बिंदु स्त्री देह ही है, फिर चाहे वह देह किसी दुधमुँही या नन्हीं बच्ची की हो या फिर किसी किशोरी या प्रौढ़ महिला की हो।  मानवता को शर्मसार कर रिश्तों को कलंकित करने वाला बलात्कार रूपी जघन्य अपराध सभ्य समाज के मुँह पर मारा गया वो करारा तमाचा है, जिसकी गूंज सदियों तक न्याय के गलियारों में गुंजायमान रहेगी क्योंकि न्याय के मंदिर कहे जाने वाले भारतीय न्यायालयों में 'सुधारात्मक न्याय प्रणाली' के चलते प्राथमिक तौर पर अपराधी के सुधरने व सभ्य नागरिक बनने की उम्मीद की जाती है लेकिन ये उम्मीद आदतन अपराधियों की आपराधिक प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लगा पाती है। ऐसे प्रकरणों में कानून की तंग गलियों से आ...

नेत्रहीन बच्चियों को स्वावलम्बी बनाता 'आत्मज्योति नेत्रहीन बालिका आवासीय विद्यालय'

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- डॉ. गायत्री शर्मा  अगस्त २०२४ में अपने ग्वालियर प्रवास के दौरान पारीख जी के बाड़ा की पवित्र भूमि पर मोदी परिवार से मिलना और उनके द्वारा किए जा रहे पारमार्थिक कार्यों के बारे में जानना मेरे लिए बीहड़ क्षेत्र के अजनबी शहर की धूप में किसी विशाल बरगद की छाँव में महफूज़ होने के सामान सुखद था। मोदी परिवार के आतिथ्य का वर्णन करना मेरे लिए शब्दातीत है क्योंकि इस परिवार के लिए हर वो छोटा-बड़ा व्यक्ति अपना है, जो उनका परिचित है या उनके परिचित का परिचित या रिश्तेदार है। बस यहीं पहचान है आपकी उसकी घर में दाखिल होने की।   रामायण की एक चौपाई में कहा गया हैं कि  'जा पर कृपा राम की होई , ता पर कृपा करे सब कोई' ।   अक्सर यह देखा जाता है कि अभाव व्यक्ति को झुकना सिखाते है और सम्पन्नता उसे गुरुर से गर्वित होना लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते है, जो संपन्न होते हुए भी सादगी से जीवन जीना पसंद करते हैं। ऐसे लोग भगवद्कृपा से मिले धन का उपयोग गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए करते हैं। एक ऐसा ही सेवाभावी परिवार है - ग्वालियर का मोदी परिवार।   'मालगुडी डेज...

ना उम्र की सीमा हो, ना जन्म का हो बंधन....

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-डॉ. गायत्री शर्मा   विवाह, पवित्रता का वो बंधन, जो प्रेम, समर्पण, त्याग, सामंजस्य व सात जन्मों के साथ का प्रतीक है। पंच तत्वों को साक्षी मानकर ली गई सप्तपदी, स्त्री और पुरुष को समाज की मर्यादा के नियम व सात वचनों के माध्यम से सदा साथ निभाने के उसूलों के बारे में बताती है। यदि वर-वधू दोनों इन वचनों को आत्मसात कर परस्पर सहयोग व प्रेम से एक-दूसरे का साथ निभाते है तो दोनों का जीवन सुखमय होने के साथ ही समाज को भी आदर्श परिवार के रूप में दो युवाओं का सहयोग मिलता है।  कहते है 'सुख' का अर्थ घर के बाहर उत्सव व आयोजनों में अपनी प्रसन्नता को दिखना मात्र ही नहीं होता है। यदि आपके घर में आध्यात्म, संस्कार, प्रेम, बड़ों व अतिथियों के आदर-सत्कार की परंपरा है तो आप घर में भी ख़ुश रहेंगे और बाहर भी। तब दिखावे के बजाय दिल के रिश्ते सहजता से घर के बाहर व भीतर खुशियों की सुवास बिखेरेंगे। विवाह से किनारा क्यों? - विवाह कब, क्यों, किससे और किस उम्र में किया जाएं, इसका सटीक उत्तर नहीं दिया जा सकता है क्योंकि यह सोच व्यक्तिशः परिवर्तित हो जाती है। पिछले दशकों में बढ़ते विवाह-विच्छेद, विवाह पश्चात अवैध ...

धरा का बांसती स्वर

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  - डॉ. गायत्री शर्मा  बसंत प्रेम और सौंदर्य का पर्व है, जब मानव मन के साथ ही प्रकृति भी अनुपम सौंदर्य से पल्लवित हो जाती है। जब चारों ओर के नज़ारे खुशनुमा होते है तब हमारा दृष्टिकोण भी स्वतः ही सकारात्मक हो जाता है। पुष्पगुच्छ से लदे पौधे, आम की नाजुक डालियों से निकलते बौर और महुए की मादकता से मदमाती प्रकृति मानों हमें भी प्रेम के प्रेमिल बंधनों की अनुभूतियों का आनंद लेने के लिए आकर्षित करती है। इस ऋतु में चहुओर आनंद, उमंग और सौंदर्य का समागम समूची सृष्टि में जीव और जगत का एकाकार कर उन्हें एक राग और एक लय में पिरो देता है।  अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी कविता में बंसत के सौंदर्य का बखूबी वर्णन किया है-  टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर, पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर  झरे सब पीले पात, कोयल की कुहुक रात  प्राची में अरूणिम की रेख देख पाता हूं गीत नया गाता हूं   बसंत नवसृजन का उत्सव है। मां वीणावादिनी की आराधना के साथ ही हम इस दिन से नव का आरंभ करते है। प्रकृति के पीत रंग में रंगकर हम भी स्वयं को उसके एक अंश के रूप में स्वीकार्य करते हैं। ऋतु परिवर...

मेरे घर राम आये हैं - गायत्री शर्मा

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मेरे राम आज घर पधारे है

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मेरे राम आज घर पधारे है विरह की पीड़ा बड़ी थी लंबी रामलला बिन मन की अवध थी सुनी कोटिक पुण्य तेरे दरस पे वारे है मेरे राम आज घर पधारे है तुझ बिन राम कैसी दिवाली अश्रुजल से बरसों जली इंतज़ार की बाती तुम जो आए पाषाण बने हृदयों में जैसे प्राण पधारे है मेरे राम आज घर पधारे है  समझ न आए कैसे करुँ मैं स्वागत दुनियादारी मैं न जानू, मैं तो तेरी प्रीत ही जानू तुझ बिन क्षण-क्षण युग-युग से मैंने काटे है मेरे राम आज घर पधारे है                                     - डॉ. गायत्री शर्मा

जीवन: पानी का बुलबुला कविता - डाॅ. गायत्री शर्मा

 मेरी कविता जीवन: पानी का बुलबुला का प्रकाशन न्यूज़ 18 जंक्शन में  https://newsjunction18.com/92559/ - डाॅ. गायत्री शर्मा

माँ चमेली देवी स्मृति नारी शक्ति सम्मान 2023

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  समाज में महिलाओं की उल्लेखनीय भूमिका को स्वीकार करते हुए महिलाओं की प्रतिभा व सफलता से समाज को नारी शक्ति के सम्मान के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष चमेली देवी ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशन्स द्वारा ' माँ चमेली देवी स्मृति नारी शक्ति सम्मान ' प्रदान किया जाता है। गत वर्षों में इस सम्मान को प्रोफेसर रेणु जैन , माननीय कुलपति देवी अहिल्या विश्वविद्यालय व पद्मश्री जनक पलटा दीदी ने गौरवान्वित किया था। इस वर्ष यानि कि 18 मार्च 2023 को पहली बार एक आदिवासी महिला डॉ . दीपमाला रावत , विषय विशेषज्ञ , जनजाति विभाग , राजभवन , भोपाल को इस सम्मान से सम्मानित किया गया।   आदिवासियों की आवाज़ बन उनकी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने में व मध्यप्रदेश के आदिवासियों के उत्थान के लिए कार्य करने में आपकी उल्लेखनीय भूमिका रही है। कोमल , सहज व मृदुभाषी दीपमाला जी की अब तक की जीवन यात्रा भी समाज के लिए प्रेरणादायी है। पढ़ाई छोड़ने के 13 वर्षों बाद अपनी बच्ची व पति ...

थक गई हूं मैं

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  - डॉ . गायत्री   थक गई हूं अब मैं चलते - चलते रूक गई हूं कुछ कहते - कहते मन में उठा है प्रश्नों का बवंडर झुक गई हूं मैं उठते - उठते   तेरी जीत , मेरी हार सब स्वीकार है मेरे तर्क , तेरे कुतर्क , तेरा सम्मान , मेरा अपमान शक , तिरस्कार और झूठा दिखावे का प्यार क्या है तेरे मन में , अब सच बोल दे ना यार   अपने बिछुड़े , सपने जले तेरे तेजाब से जल गई रक्त कणिकाएं भी तू महफूज़ है पर तेरे कारण जिंदगी और मौत से हरक्षण लड़ी हूं मैं   दहेज की आग में जली हूं मैं गर्भ में घुट - घुटकर मरी हूं मैं भूखे भेड़िये सा तन - मन सब नौंच गया तू तेरा नाम हो गया और बदनाम हो गई हूं मैं   हार गई हूं मैं सिसकियां भरते - भरते शुष्क हो गये आंखों के दरिया भी अब दर्द की अब इंतहा हो गई मोम थी कल तक अब पाषाण हो गई   तन झांका पर मन न झांका इन नैनों की भाषा तू समझ न पाया सिहर जाती हूं तेरे नाम से ...