Sunday, December 29, 2013

‍न फनकार तुझसा तेरे बाद आया, मोहम्मद रफी तू बहुत याद आया ...

संगीत सम्राट मोहम्मद रफी की तारीफ में कुछ कहना सूरज को रोशनी दिखाने के समान है। गायन के क्षेत्र में रफी का जो कद है, उसे छू पाना भी आज के दौर के किसी गायक के बस की बात नहीं है। रफी अपने गीतों में जो सालों पहले गुनगुना कर कह गए, वह आज भी ताज़ा तरीन सा लगता है। दिल की गहराईयों से सुने तो रफी के गीतों में पिरोये अल्फाज़ आपकी और हमारी जिंदगी की ही कहानी है, जिसमें प्रेम की मिठास है, मिलन की पुरवाई है, दर्द की कसक है, और प्रेम में ठोकर खाने पर ज़माने से मिली रूसवाई है। प्रेम के युगल गीतों के साथ ही दर्द भरे नगमों में भी दूर-दूर तक रफी का कोई सानी नहीं है। आज भी तन्हाई में रफी के दर्द भरे नग़में विरह की कसक बन हमारी आँखों से आँसू बन छलकते है और हमराज बन हमारे दिल के दर्द को बँया करते हैं। क्या बात हो, जब रात हो, तन्हाई हो और रफी की रूहानी आवाज़ हो। तब रात गुनगुनाते हुए कब बीत जाएगी, आपको पता ही नहीं चलेगा।
24 दिसम्बर 1924 को एक आम इंसान के रूप में जन्म लेने वाला यह फरिश्ता सुरों के मामले में खुदा की विशेष नैमतों से नवाज़ा गया था। रफी के इस जन्मजात हूनर को तराशना व उनके गीतों को सुरों के कड़े कायदों में बाँधना एक अहम काम था। रफी को भारतीय शास्त्रीय संगीत की तालीम देकर उनके सुरों को परिष्कृत करने का बेहद महत्वपूर्ण कार्य किया रफी के संगीत शिक्षक उस्ताद बड़े गुलाम अली खाँ साहब और उस्ताद वाहिद अली खान साहब ने। संगीत की तालीम लेने के बाद नौशाद साहब के मार्गदर्शन ने रफी के लिए कामयाबी का एक नया मार्ग प्रशस्त किया। रफी से पहले नौशाद साहब के पसंदीदा गायक तलत मेहमूद थे लेकिन एक दिन स्टूडियों में सिगरेट पीते देख नौशाद साहब ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया और उसी दिन से रफी को नौशाद की टीम में बतौर गायक इंट्री मिल गई। संगीत की साधना 35 वर्षों के सफर में रफी साहब ने लगभग 700 फिल्मों में 4,956 से अधिक गीत गाएँ। न केवल दर्द भरे बल्कि प्रेम गीत, गज़ल और भक्ति संगीत को भी रफी ने अपने सुरों में बखूबी पिरोया।

प्रेम के वैविध्यपूर्ण रंगों और भावों से सजे रफी के नग़मों को सुनकर ऐसा लगता है मानों रफी के सुर उत्प्रेरक बन हमारे दिल के किसी कोने में धूल खा रही खट्टी-मीठी यादों की प्रेमिल पलों की पोटली खोल हमारे ‍मिलन की मिठास और विरह के दर्द को ताजा कर रहे हैं। उत्कृष्ट गायन के लिए 5 राष्ट्रीय पुरस्कारों के साथ ही 6 फिल्म फेयर पुरस्कार से नवाजे जाने वाले सुरों के सम्राट रफी को वर्ष 1967 में भारत सरकार ने ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया। रफी ने अपने दौर के हर बड़े अभिनेता के लिए गीत गाएँ। दिलीप कुमार, शम्मी कपूर, गुरूदत्त, राजेश खन्ना, संजीव कुमार जैसे कई बड़े अभिनेता की सफलता में रफी की सुरमयी आवाज का भी एक बड़ा हाथ था। फिल्मों ने जहाँ रफी ने दिलीप कुमार की उदासी को अपनी दर्द भरी आवाज से सजाया, वहीं देवानंद के प्यार के इजहार में रफी की मधुर आवाज ने मदहोश कर देने वाला समा बाँधा। गायक और अभिनेता किशोर कुमार के लिए भी रफी ने गीत गाएँ। फिल्म इंडस्ट्री में पिच बदल-बदल कर गायन की कला की शुरूआत करने का श्रेय मोहम्मद रफी को ही जाता है। रफी ने ज़ीनत बेगम, नूरजहाँ, लता, आशा आदि के साथ युगल गीत गाएँ। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, ओपी नैय्यर, शंकर जयकिशन, रवि और नौशाद जैसे म्यूजिक डायरेक्टर के साथ रफी ने काम कर फिल्मों में अच्छे गीत-संगीत के उच्च मानक स्थापित किए। गायन के क्षेत्र में सफलता के ऊँचे मुकाम पर पहुँचने वाले रफी स्वभाव से बहुत शर्मीले थे। यही वजह थी कि उनके लिए प्रेस को इंटरव्यू देने का काम उन्होंने अपने बड़े भाई को सौंप रखा था।

1974 में रफी के सितारे बुलंदी के शीर्ष पर थे। इसी वर्ष रफी को फिल्म वर्ल्ड मैग्जीन ने ‘हवस’ फिल्म के ‘तेरी गलियों में न रखेंगे कदम ....’ गीत के लिए बेस्ट सिंगर के अवार्ड से सम्मानित किया गया। 1977 में रफी को फिल्म ‘हम किसी से कम नहीं’ के गीत ‘क्या हुआ तेरा वादा ...’ गीत के लिए फिल्म फेयर और नेशनल अवार्ड के लिए नवाज़ा गया। रफी ने कभी पुरस्कार पाने के लिए नहीं गाया। बल्कि उन्होंने संगीत को साधना मानकर उसके माध्यम से अल्लाह की इबादत की। यही वजह है कि कामयाबी के शीर्ष मुकाम पर पहुँचने के बाद भी रफी अहंकार से कोसो दूर थे। गायन के क्षेत्र में जितनी ऊँचाई पर वह थे, व्यवहारिकता के मामले में वे अपने दिल में उतनी गहराई व नम्रता को समेटे थे। सुरों के इस नायाब कलाकार को श्रृद्धांजलि देने के साथ ही आप और हम एक नज़र डालते हैं रफी के सुरों में पिरोये खूबसूरत नग़मों पर –

1.       बहारों फूल बरसाओ, मेरा मेहबूब आया है ...
2.       मैंने पूछा चाँद से ....
3.       आज मौसम बड़ा बेईमान है ...
4.       पत्थर के सनम तुझे हमने ...
5.       दिल पुकारे आ रे आ रे आ रे ...
6.       मेरे मेहबूब तुझे मेरी मोहब्बत की कसम ...
7.       तेरे मेरे सपने अब एक रंग है ...
8.       बाबुल की दुआएँ लेती जा ...
9.       ईशारों ईशारों में दिल लेने वाले ...
10.   आजा आजा मैं हूँ प्यार तेरा .... 
11.   दिल की महफि, सजी है चले आइएँ ...
12.   ये चाँद सा रोशन चेहरा ...
13.   खिलौना जानकर तुम तो ....
14.   अहसान तेरा होगा मुझ पर ...
15.   दिल के झरोखे में तुझको ...
- गायत्री

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